Thursday, January 5, 2023

पौष माह की पूर्णिमा 06 जनवरी 2023

 प्राचीन श्री गौरी शिव शंकर मनोकामना सिद्ध मन्दिर (श्री शिव मन्दिर) 

आपसभी भगतगणो को पौष पूर्णिमा पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं महंत/पुजारी:- श्री पप्पू बाबा(उर्फ श्री राज कुमार पाण्डेय) कॉलेक्ट्रीट घाट पटना बिहार इंडिया

हिंदू पंचाग के तिथि में चंद्रमा के अनुसार ही बदलती है। इस दिन धार्मिक मान्यता के अनुसार दान और स्नान का बहुत ही महत्व होता है। यहां जानिए तिथि और समय:--



इस बार पौष माह की पूर्णिमा 06 जनवरी 2023 को मनाई जाएगी। इस दिन चंद्रमा का आकार पूरा होता है। पौष के माह को सूर्य का माह भी कहा जाता है। पौष पूर्णिमा के दिन स्नान और दान को महत्वपूर्ण माना गया है। इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों के पूजन से मनोकामनाएं पूर्ण होती है और जीवन की हर बाधा दूर होती है।

हिंदू धर्म में पूर्णिमा को बेहद खास माना जाता है। इस बार की पौष मास की पूर्णिमा 06 जनवरी 2023 को मनाई जाएगी। यह साल 2023 की पहली पूर्णिमा है। पूर्णिमा के दिन चंद्रमा पूर्ण आकार में होता है। पौष को भगवान सूर्य का महीना कहा जाता है इसलिए इस महीने में आने वाली पूर्णिमा को पौष पूर्णिमा कहते हैं। हिन्दू धर्म में इस पूर्णिमा का काफी महत्व दिया जाता है और इस दिन लोग अलग-अलग रीति-रिवाज़ों से पूजा करते हैं। मान्यता के अनुसार, पौष पूर्णिमा पर विधिवत पूजन से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है। पौष पूर्णिमा के दिन दान, स्नान और सूर्य देव को अर्घ्य देने का विशेष महत्व बतलाया गया है। 

पौष पूर्णिमा का महत्व (Paush Purnima 2023 Importance) 

वैदिक ज्योतिष के अनुसार, पौष सूर्य देव का माह कहलाता है। इस मास में सूर्य देव की आराधना से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसलिए पौष पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान और सूर्य देव को अर्घ्य देने की परंपरा है। पौष का महीना सूर्य देव का माह है और पूर्णिमा चंद्रमा की तिथि है। अतः सूर्य और चंद्रमा का यह अद्भूत संगम पौष पूर्णिमा की तिथि को ही होता है। इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों के पूजन से मनोकामनाएं पूर्ण होती है और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती है।

पौष पूर्णिमा 2023 शुभ मुहूर्त (Paush Purnima 2023 Shubh Muhurat)

पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 06 जनवरी 2023 को रात 02 बजकर 16 मिनट पर होगी और इसका समापन 07 जनवरी 2023 को सुबह 04 बजकर 37 मिनट पर होगा। उदयातिथि के अनुसार, पौष पूर्णिमा इस बार 06 जनवरी को ही मनाई जाएगी. साथ ही इस बार पौष पूर्णिमा पर सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है। यह एक अत्यंत शुभ योग माना जाता है और इसमें किए गए सभी कार्य सफल होते हैं। सर्वार्थ सिद्धि योग 7 जनवरी, 2023 शनिवार को रात 12 बजकर 14 मिनट से शुरू होगा और इसका समापन सुबह 7 बजकर 15 मिनट पर होगा। 

पौष पूर्णिमा पूजन विधि (Paush Purnima 2023 Pujan Vidhi)

सुबह स्नान से पहले व्रत करने का संकल्प लिया जाता है। पवित्र नदी में नहाने के बाद भगवान को अर्घ्य दें। सबसे पहले सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद भगवान मधुसूदन की पूजा करनी चाहिए. इसके बाद ब्राह्मण या किसी जरूरतमंद को भोजन कराएं। इस दिन कंबल, गुड़, तिल जैसी चीजों का दान करना शुभ माना जाता है।

Sunday, November 6, 2022

देव दिवाली 7 नवम्बर 2022


प्राचीन श्री गौरी शिव शंकर मनोकामना सिद्ध मंदिर (श्री शिव मंदिर)

आप सभी भगतगणो को देव 🌏दिवाली की हार्दिक शुभकामनाएं   महंत/पुजारी:- श्री पप्पू बाबा (उर्फ श्री राज कुमार पाण्डेय) कॉलेक्ट्रीट घाट पटना बिहार इंडिया PLEASE CONTACT ME


देव दीवाली पर दीपदान का है खास महत्व, जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और विधि. हिंदू धर्म में कार्तिक मास की पूर्णिमा का खास महत्व है. इस दिन को देव दीवाली के तौर पर भी मनाया जाता है. इस साल देव दीपावली 07 नवंबर को मनाई जाएगी।

 देव दीपावली के दिन दीप दान का खास महत्व है।

Dev Diwali 2022: देव दीवाली पर दीपदान का है खास महत्व, जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और विधि


Dev Diwali 2022 Date: हिंदू धर्म में कार्तिक मास की पूर्णिमा का खास महत्व है. इस दिन को देव दीवाली के तौर पर भी मनाया जाता है. इस साल देव दीपावली 07 नवंबर को मनाई जाएगी।

 Dev Diwali 2022 Date: देव दीपावली के दिन दीप दान का खास महत्व है।

 Dev Diwali 2022 Date: कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को देव दीवाली का पर्व मनाया जाता है. यह दीपावली के 15 दिन बाद पड़ता है। इस साल देव दीवाली 7 नवंबर को मनाई जाएगी. बनारस में देव दीवाली का त्योहार खास उत्साह और समर्पण के साथ मनाया जाता है. इस दिन गंगा नदी में दीपदान करने की परंपरा है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार देव दीवाली, भगवान शिव के त्रिपुरासुर पर विजय प्राप्त करने की खुशी में मनाया जाता है। देव दीवाली को लेकर धार्मिक मान्यता यह भी है कि इस दिन देवता गण पृथ्वी पर आते हैं और काशी में दीवाली मनाते है। इसलिए इसे देव दीवाली कहा जाता है। इस दिन दीपदान का विशेष महत्व है. आइए जानते हैं देव दीपावली की तिथि, शुभ मुहूर्त और दीपदान का महत्व।



कब है देव दीवाली 2022 | Dev Diwali 2022 date

हिंदू पंचांग के अनुसार देव दीवाली कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है. इस साल कार्तिक पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 7 नवंबर 2022 को शाम 4 बजकर 15 मिनट से हो रही है. वहीं पूर्णिमा तिथि की समाप्ति 8 नवंबर को शाम 4 बजकर 31 मिनट पर हो रही है. ऐसे में देव दीपावली 07 नवंबर 2022 को मनाई जाएगी।



 देव दीपावली 2022 शुभ मुहूर्त | Dev Diwali 2022 Shubh Muhurat

प्रदोष काल में दीपदान का मुहूर्त - 05:14 शाम से 07:49 संध्या

पूर्णिमा तिथि आरंभ - नवम्बर 07, 2022 को 04:15 शाम बजे

 पूर्णिमा तिथि समाप्त - नवम्बर 08, 2022 को 04:31 शाम बजे

देव दीवाली पर कैसे करें दीपदान | how to Deep Daan on Dev Diwali

देव दीवाली पर यानी कार्तिक पूर्णिमा के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान ध्यान से निवृत हो जाएं. इसके बाद सबसे पहले उगते हुए सूर्य को जल अर्पित करें. फिर तुलसी माता को जल अर्पित करें. इसके बाद भगवान शिव और भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए. देव दीवाली पर शाम के समय प्रदोष काल में 11, 21, 51 या 108 आटे का दीया बनाकर उसमें तेल डालें. इसके बाद सभी देवी-देवताओं और ईष्ट देव का स्मरण करते हुए दीपक पर कुमकुम, हल्दी, अक्षत, और फूल अर्पित करें. इसके बाद दीपक को नदी में विसर्जित करना चाहिए।

दीपदान का क्या है महत्व | Deep Daan Importance



पौराणिक मान्यता है कि देव दीवाली यानी कार्तिक पूर्णिमा के दिन काशी के गंगा घाट पर स्नान करने के लिए पधारते हैं। मान्यता है कि जो कोई इस दिन प्रदोष काल में नदी में दीपदान करता है, उसे शत्रुओं का भय नहीं सताता है। इसके अलावा जीवन में सुख-समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है. कहा जाता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान शिव के निमित्त दीपक जलाने से जीवन में उन्नति होती है. इसके अलावा मान्यता यह भी है कि देव दीवाली पर दीपदान करने से यम, शनि, राहु-केतु के बुरे प्रभाव कम हो जाते हैं और मां लक्ष्मी की कृपा से आर्थिक जीवन खुशहाल रहता है।

Thursday, November 3, 2022

 Dev Uthani Ekadashi and Tulsi Vivah 2022 Date: 


देवउठनी एकादशी और तुलसी विवाह की तारीखों में कन्फ्यूजन, जानें सही डेट-टाइम

देवउठनी एकादशी के अगले दिन भगवान विष्णु के शालीग्राम स्वरूप और माता तुलसी का विवाह कराया जाता है. कहते हैं कि देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु चार महीने बाद योग निद्रा से जागते हैं. इस बार देवउठनी एकादशी और तुलसी विवाह की तारीखों को लेकर लोगों में बड़ा कन्फ्यूजन है. 


Dev Uthani Ekadashi and Tulsi Vivah 2022 Date: 

हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवउठनी एकादशी मनाई जाती है. इसके अगले दिन भगवान विष्णु के शालीग्राम स्वरूप और माता तुलसी का विवाह कराया जाता है. कहते हैं कि देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु चार महीने बाद योग निद्रा से जागते हैं. इस बार देवउठनी एकादशी और तुलसी विवाह की तारीखों को लेकर लोगों में बड़ा कन्फ्यूजन है. आइए जानते हैं कि इसकी तिथियां क्या हैं.



कब है देवउठनी एकादशी?

देवउठनी एकादशी कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है. इस बार कार्तिक शुक्ल एकादशी तिथि गुरुवार, 03 नवंबर को शाम 07 बजकर 30 मिनट से लेकर शुक्रवार, 04 नवंबर को शाम 06 बजकर 08 मिनट तक रहेगी. ऐसे में देवउठनी एकादशी 04 नवंबर को मनाई जाएगी.

देवउठनी एकादशी का पारण

जो लोग देवउठनी एकादशी के दिन व्रत रखने वाले हैं, वे 05 नवंबर दिन शनिवार को सुबह 06 बजकर 36 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 47 मिनट तक व्रत का पारण कर सकते हैं.

कब है तुलसी विवाह?


तुलसी विवाह कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाया जाता है. इस बार कार्तिक शुक्ल द्वादशी तिथि शनिवार, 05 नवंबर को शाम 06 बजकर 08 मिनट से आरंभ होगी और रविवार, 06 नवंबर को शाम 05 बजकर 06 मिनट पर इसका समापन होगा. ऐसे में तुलसी विवाह 05 नवंबर को किया जाएगा.

देवउठनी एकादशी की पूजन विधि



एकादशी के दिन सुबह स्नानादि के बाद व्रत संकल्प लें. इसके बाद भगवान विष्णु की पूजा करें और उनके सामने दीप-धूप जलाएं. उन्हें फल, फूल, मिठाई और भोग अर्पित करें. भगवान विष्णु को तुलसी बहुत प्रिय है. इसलिए इस दिन उन्हें तुलसी दल जरूर अर्पित करें.

शाम के समय भगवान विष्णु के मंत्रो का जाप करें. इस दिन सात्विक आहार का ही सेवन करें. चावल खाने से बचें और ब्रह्मचर्या का पालन करें.



तुलसी विवाह की पूजन विधि

तुलसी विवाह पर सूर्योदय के समय स्नानादि के बाद घर के मंदिर में दीपक प्रज्वलित करें. विष्णु जी का गंगाजल से अभिषेक करें. उन्हें तुलसी दल अर्पित करें. तुलसी विवाह के दिन विष्णु के शालीग्राम अवतार का तुलसी के साथ विवाह कराया जाता है. विवाह संपन्न होने के बाद भगवान विष्णु की आरती उतारें और उन्हें भोग लगाएं. इस दिन विष्णु जी को तुलसी का भी भोग लगाया जाता है.

Thursday, October 27, 2022

आप सभी को श्री छठ पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं

प्राचीन श्री गौरी शिव शंकर मनोकामना सिद्ध मन्दिर (श्री शिव मन्दिर)  



आपसभी भगतगणो को छठ पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं महंत/पुजारी:- श्री पप्पू बाबा(उर्फ श्री राज कुमार पाण्डेय) कॉलेक्ट्रीट घाट पटना बिहार इंडिया 

छठ पूजा: समय, तिथि और अनुष्ठान

नहाई खाई - 28 अक्टूबर (सुबह 06:42 बजे सूर्योदय; शाम 06:04 बजे सूर्यास्त)

चार दिनों तक चलने वाले इस उत्सव की शुरुआत 'नहाई खाई' की रस्म से होती है।  भक्त अपने घरों को साफ करते हैं और एक जल निकाय में पवित्र डुबकी लगाते हैं, अधिमानतः गंगा नदी में।  छठ व्रत करने वाली महिलाएं इस दिन सिर्फ एक बार भोजन करती हैं।  

खरना - 29 अक्टूबर (सुबह 06:43 बजे सूर्योदय, शाम 06:04 बजे सूर्यास्त)

दूसरे दिन को खरना कहा जाता है जब पूरा परिवार सूर्य देव की पूजा करता है।  महिलाएं भी इस दिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक बिना पानी की एक बूंद पिए उपवास करती हैं।

छठ पूजा - 30 अक्टूबर (सुबह 06:43 बजे सूर्योदय; 

शाम 06:03 बजे सूर्यास्त) तीसरे दिन लोग छठ पूजा करते हैं।  छठ पूजा के अवसर पर महिलाएं पूरे दिन बिना पानी पिए व्रत रखती हैं।

उषा अर्घ्य - 31 अक्टूबर (सुबह 06:44 बजे सूर्योदय; शाम 06:02 बजे सूर्यास्त)

 छठ पूजा चौथे दिन समाप्त होती है जिसे उषा अर्घ्य के नाम से जाना जाता है।  इस दिन, विश्वासी सूर्योदय से पहले पानी में खड़े होते हैं और सूर्य भगवान को प्रसाद चढ़ाते हैं।  छठ पूजा बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है।

आयोजन के दौरान किन देवताओं की पूजा की जाती है?

 छठ पूजा के दौरान, भक्त सूर्य देव (भगवान सूर्य) और छठी मैया से उनकी समृद्धि और कल्याण के लिए प्रार्थना करते हैं।


 प्राचीन श्री गौरी शिव शंकर मनोकामना सिद्ध मन्दिर (श्री शिव मन्दिर) आपसभी भगतगणो को चित्र गुप्त पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं महंत/पुजारी:- श्री पप्पू बाबा(उर्फ श्री राज कुमार पाण्डेय) कॉलेक्ट्रीट घाट पटना बिहार इंडिया





Chitragupta Puja 2022 Date: 

दिवाली के दूसरे दिन यानि कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि को चित्रगुप्त पूजा का आयोजन होता है. चित्रगुप्त पूजा भी दो दिन आज 26 अक्टूबर और कल 27 अक्टूबर को मनाया जा रहा है. यहां जानें सही तारीख और मुहूर्त।



  Chitragupta Puja 2022 Date: दिवाली के दूसरे दिन यानि कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि को चित्रगुप्त पूजा का आयोजन होता है. इस साल धनतेरस और भाई दूज की तरह ही चित्रगुप्त पूजा की तारीख पर भी लोगों में असमंजस की स्थिति दिख रही है. चित्रगुप्त पूजा भी दो दिन आज 26 अक्टूबर और कल 27 अक्टूबर को मनाया जा रहा है. काशी के ज्योतिषाचार्य चक्रपाणि भट्ट के अनुसार, चित्रगुप्त पूजा हमेशा द्वितीया तिथि को मनाते हैं, जो यम द्वितीया के नाम से भी प्रचलित है. यम द्वितीया या भाई दूज के दिन ही चित्रगुप्त पूजा करने का विधान है. ऐसे में पंचांग के आधार पर उदयातिथि को देखते हुए चित्रगुप्त पूजा 27 अक्टूबर को करना श्रेष्ठ रहेगा. आइए जानते हैं चित्रगुप्त पूजा का शुभ मुहूर्त और तिथि. व।चित्रगुप्त पूजा 2022 सही तारीख

 काशी विश्वनाथ ऋषिकेश पंचांग के आधार पर कार्तिक शुक्ल द्वितीया तिथि 26 अक्टूबर को दोपहर 03:35 बजे से शुरू हो रही है. यह तिथि 27 अक्टूबर गुरुवार को दोपहर 02:12 बजे समाप्त होगी. उदयाति​​थि की मान्यता के अनुसार, चित्रगुप्त पूजा 27 अक्टूबर को मनाया जाना शास्त्र सम्मत है. चित्रगुप्त पूजा मुहूर्त 2022

 आयुष्मान योग: प्रात:काल से सुबह 07:27 बजे तकसौभाग्य योग: सुबह 07:27 बजे से 28 अक्टूबर को प्रात: 04:33 बजे तकसर्वार्थ सिद्धि योग: दोपहर 12:11 बजे से लेकर 28 अक्टूबर को सुबह 06:30 बजे तकअभिजित मुहूर्त: सुबह 11:42 बजे से दोपहर 12:27 बजे तकराहुकाल: दोहपर 01:29 बजे से दोपहर 02:52 बजे तक


 चित्रगुप्त पूजा के दिन भद्रा का साया नहीं है, इसलिए आप राहुकाल को छोड़कर इन सभी शुभ योग और मुहूर्त में चित्रगुप्त पूजा कर सकते हैं।


चित्रगुप्त पूजा 2022 दिन-रात के शुभ समय

 लाभ-उन्नति: सुबह 06:29 बजे से सुबह 07:53 बजे तकअमृत-सर्वोत्तम: सुबह 07:53 बजे से सुबह 09:17 बजे तकशुभ-उत्तम: सुबह 10:41 बजे से दोपहर 12:05 बजे तकलाभ-उन्नति: शाम 04:17 बजे से शाम 05:41 बजे तकशुभ-उत्तम: शाम 07:17 बजे से रात 08:53 बजे तकअमृत-सर्वोत्तम: रात 08:53 बजे से रात 10:29 बजे तक चित्रगुप्त पूजा का महत्व

 सभी मनुष्यों के कर्म फल का लेखा-जोखा रखने का कार्य चित्रगुप्त करते हैं. लेखा-जोखा कार्य कलम के माध्यम से होता है, इसलिए चित्रगुप्त पूजा के दिन कलम और दवात की पूजा की जाती है. कायस्थ समाज इस दिन चित्रगुप्त, लेखनी, बहीखाता आदि की पूजा करता है. चित्रगुप्त के आशीर्वाद से बुद्धि, वाणी के साथ बिजनेस में तरक्की होती है. चित्रगुप्त पूजा के दिन लेखन कार्य नहीं करते हैं

Friday, October 21, 2022

शुभ धनतेरस

 धनतेरस 2022:- 27 साल बाद धनतेरस का मान दो दिन तक है।

प्राचीन श्री गौरी शिव शंकर मनोकामना सिद्ध मंदिर (श्री शिव मंदिर) 


 सभी भक्तगणों को धनतेरस पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं 🕉  PLEASE CONTACT ME 

महंत/पुजारी :- श्री पप्पू बाबा (उर्फ श्री राज कुमार पाण्डेय) कॉलेक्ट्रियट घाट

 

धनतेरस के साथ ही पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआज होगी। इस बार धनतेरस दो दिन का होने जा रहा है।


धनतेरस के साथ ही पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआज होगी। इस बार धनतेरस दो दिन का होने जा रही है, जिसके लिए बाजार भी तैयार हैं। धातु के सामान व बर्तन खरीदने की परंपरा के चलते बर्तन और सोने चांदी की दुकानों पर सजावट की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। 27 साल बाद धनतेरस का मान दो दिन तक रहेगा। हालांकि मूल रूप से धनतेरस 23 अक्टूबर की ही रहेगी।

Diwali Dhanteras: धनतेरस पर शाम सवा 5 बजे से खरीदारी का योग, दिवाली चौघड़िया पूजन मुहूर्त भी जान लें।

 


इस वर्ष कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी 22 और 23 अक्टूबर दो दिन प्रदोष व्यापिनी है। इन दोनों दिन प्रदोषकाल लगभग शाम 5.45 से रात्रि 8.20 बजे तक रहेगा। वहीं दूसरे दिन 23 अक्टूबर 2022 को त्रयोदशी तिथि प्रदोषकाल को अपेक्षाकृत बहुत कम समय के लिए व्याप्त कर रही है। परन्तु यदि दोनों दिन त्रयोदशी प्रदोष व्यापिनी हो तो दूसरे दिन ही मान्य होगी। ऐसे में पहले दिन रात में और दूसरे दिन दिनभर खरीदारी होगी। उदया तिथि के मान के अनुरूप 23 अक्टूबर को धनतेरस मनाई जाएगी।


 त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 22 अक्टूबर को शाम 6:02 बजे होगी और समापन 23 अक्टूबर को शाम 6:03 बजे होगा। 23 अक्टूबर को शाम 6:04 बजे से चतुर्दशी तिथि शुरू होगी और 24 अक्टूबर तक शाम 5:28 तक रहेगी। उदया तिथि अनुसार 24 अक्टूबर को नरक चतुर्दशी है और हनुमान जयंती भी मनाई जाएगी।



घी का दीपक जलाएं, प्रसाद निवेदित करें

23 अक्टूबर 2022 को धनतेरस मनाना श्रेष्ठ रहेगा। इस दिन उदयव्यापिनी त्रयोदशी तिथि पूरे दिन व्याप्त रहेंगी, जो की प्रदोषकाल में शाम 6.03 बजे समाप्त होगी। धनतेरस के दिन भगवान धन्वन्तरि का जन्मदिवस भी होता है, इसलिए धनतेरस को 'धन्वन्तरि जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन भगवान धन्वन्तरि जी को घी का दीपक और प्रसाद निवेदित करना चाहिए। इस दिन धनवंतरि की पूजा, मां लक्ष्मी और कुबेर का पूजन और सोना, चांदी, बर्तन घरेलू सामान की खरीदारी करना शुभ है। 23 अक्टूबर को प्रदोष व्रत होगा और शनि भी मार्गी हो रहे हैं, जो कई राशियों के जीवन में, धन, संपत्ति, समृद्धि लाएंगे।

निम्न मंत्र ग्यारह बार बोलना चाहिए:

'आयुर्वेद साक्षी - करुणाश्री भगवन आगच्छ सत्वरा धन्वन्तरि त्वं सदा अल्पायु जरा-रोग, दीपावली 24 अक्टूबर को मनेगी।

दीपावली का पर्व कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। इस साल 2022 में कार्तिक अमावस्या की तिथि 24 अक्टूबर, सोमवार के दिन दीपावली मनाई जाएगी। यह पर्व सुख-समृद्धि और वैभव का प्रतीक है। दीपावली के पर्व पर मां लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है। श्रीमहालक्ष्मी पूजन एवं दीपावली का महापर्व कार्तिक अमावस्या में प्रदोष काल एवं अर्द्धरात्रि व्यापिनी हो, तो विशेष रूप से शुभ होती है। लक्ष्मी पूजन, दीपदानादि के लिए प्रद्येषकाल ही विशेषतः प्रशस्त माना गया है। 24 अक्टूबर को शाम 5.27 बजे के बाद प्रदोष, निशीथ तथा महानिशीथ व्यापिनी होगी। अत: दीपावली पर्व 24 अक्टूबर की मनेगी। इसके बाद शाम को 5.27 बजे से अमावस्या तिथि प्रारम्भ हो जाएगी जो 25 अक्टूबर 2022 को शाम 4.18 बजे तक रहेगी

Sunday, October 16, 2022

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 🕉जय भोले नाथ 🕉 हर हर महादेव 🌍

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सभी भक्तगणों को सोमवार की हार्दिक शुभकामनाएं जय महदेव 🕉





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