Saturday, October 14, 2023

Happy Navratri Puja Everyone


 प्राचीन श्री गौरी शिव शंकर मनोकामना सिद्ध मन्दिर (श्री शिव मंदिर महंत/पुजारी:- श्री पप्पू बाबा(उर्फ श्री राज कुमार पाण्डेय) कॉलेक्ट्रीट घाट पटना बिहार इंडिया


15 अक्टूबर से शुरू होगा देवी पूजा का महापर्व:इस साल शारदीय नवरात्रि में कोई तिथि क्षय नहीं, 23 अक्टूबर को महानवमी और 24 को दशहरा


              रविवार, 15 अक्टूबर से देवी पूजा का महापर्व शारदीय नवरात्रि शुरू होगा। इस साल नवरात्रि में कोई तिथि क्षय नहीं है, इस कारण ये पर्व पूरे नौ दिन चलेगा। 23 तारीख को महानवमी और 24 को दशहरा मनाया जाएगा। हिन्दी पंचांग में साल में चार बार नवरात्रि आती है। आश्विन और चैत्र नवरात्रि प्रकट होती है। आषाढ़ और माघ मास की नवरात्रि गुप्त रहती है।   प्राचीन श्री गौरी शिव शंकर मनोकामना सिद्ध मन्दिर (श्री शिव मंदिर महंत/पुजारी:- श्री पप्पू बाबा(उर्फ श्री राज कुमार पाण्डेय) कॉलेक्ट्रीट घाट पटना बिहार इंडिया, 15 अक्टूबर को नवरात्रि की शुरुआत सूर्य-बुध के बुधादित्य योग से होगी। ये दोनों ग्रह कन्या राशि में रहेंगे। रविवार, नवरात्रि की शुरुआत और बुधादित्य योग होने से पूजा-पाठ के लिए दिन शुभ रहेगा।


जानिए नवरात्रि की शुरुआत में ध्यान रखें ये बातें


नवरात्रि की शुरुआत में घर के अंदर और बाहर साफ-सफाई करें। गोमूत्र का छिड़काव करें। घर के बाहर देवी मां के स्वागत के लिए रंगोली बनाएं।


देवी पूजा में सुहाग का सामान जरूर रखें। जैसे लाल चुनरी, लाल फूल, कुमकुम, सिंदूर, लाल चूड़ियां, बिन्दी, आभूषण जरूर रखें। नौ दिन देवी पूजा करें और अंतिम दिन पूजा के बाद ये सभी चीजें जरूरतमंद महिला को दान करें।


देवी दुर्गा के साथ गणेश जी, शिव जी, कार्तिकेय स्वामी की भी पूजा जरूर करें। गणेश जी की पूजा के साथ देवी पूजन शुरू करना चाहिए। शिवलिंग पर तांबे के लोटे से जल चढ़ाएं। गणेश जी दूर्वा अर्पित करें। कार्तिकेय स्वामी का भी अभिषेक करें।


दुर्गा पूजा करते समय देवी मंत्र का जप करना चाहिए। देवी मंत्र - दुं दुर्गायै नमः। आप चाहें तो देवी भगवती के नामों का जप भी कर सकते हैं। नवरात्रि में देवी पूजा के साथ छोटी कन्याओं की पूजा करनी चाहिए। छोटी कन्याएं देवी मां की स्वरूप मानी जाती हैं। पूजा के साथ ही जरूरमंद बच्चियों की शिक्षा के लिए धन और अन्य सामग्री जरूर अर्पित करें।


Tuesday, August 29, 2023

Sawan Purnima 2023

 

प्राचीन श्री गौरी शिव शंकर मनोकामना सिद्ध मन्दिर (श्री शिव मंदिर महंत/पुजारी:- श्री पप्पू बाबा(उर्फ श्री राज कुमार पाण्डेय) कॉलेक्ट्रीट घाट पटना बिहार इंडिया

Sawan Purnima 2023: सावन की पूर्णिमा कब है 30 या 31 अगस्त? जानिए सही तिथि, मुहूर्त और स्नान-दान का महत्व


Sawan Purnima 2023: हिंदू धर्म में सावन पूर्णिमा का खास महत्व है। इस दिन ही सावन माह खत्म हो जाता है। पूर्णिमा के दिन स्नान-दान करना काफी फलदायी माना जाता है।

 

Sawan Purnima 2023: 

हिंदू धर्म में पूर्णिमा का विशेष महत्व है। इस दिन स्नान-दान करने से पुण्य फलों की प्राप्ति होती है। वहीं पूर्णिमा के दिन तर्पण करने से पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस साल सावन पूर्णिमा की शुरुआत 30 अगस्त को होगी जो कि  31 अगस्त की सुबह तक रहेगी। हिन्दू पंचांग के अनुसार श्रावण मास में आने वाली पूर्णिमा सावन या श्रावणी पूर्णिमा कहलाती है। सावन पूर्णिमा का दिन ही रक्षाबंधन का त्यौहार भी मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाई को राखी या रक्षासूत्र बांधती हैं और भाई अपनी बहन की ताउम्र रक्षा करने का वचन देता है। सावन पूर्णिमा के साथ ही सावन माह भी खत्म हो जाएगा। आपको बता दें कि इस सास मलमास या अधिकमास लगने की वजह से सावन एक की जगह दो महीने का था। 

 

पूर्णिमा के दिन स्नान-दान का महत्व

 

सावन पूर्णिमा के दिन अलग-अलग तीर्थ स्थलों पर स्नान-दान किया जाएगा। किसी भी पूर्णिमा के दिन स्नान-दान करने से जातक के जीवन में चल रही समस्याओं का समाधान निकलता है और जीवन सुखमय बनता है। लेकिन अगर आप आज किसी तीर्थ स्थल पर जाने में असमर्थ है तो आज के दिन घर पर ही नहाने के पानी में कुछ बूंद गंगाजल डालकर स्नान कर जरूरतमंद को कुछ दान कर लाभ उठा सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन पूर्णिमा के दिन तर्पण करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है और पितृ दोष भी दूर होता है। इसके साथ ही सभी तरह के ग्रह दोष भी दूर होते हैं।

सावन पूर्णिमा 2023 तिथि और शुभ मुहूर्त

पंचाग की गणना के अनुसार सावन माह की पूर्णिमा की तिथि

30 अगस्त बुधवार को दोपहर 12 बजकर 28 मिनट से शुरू हो रही है और 

* 31 अगस्त गुरुवार को सुबह 8 बजकर 35 मिनट तक रहेगी.


Tuesday, July 18, 2023

#G20

 प्राचीन श्री गौरी शिव शंकर मनोकामना सिद्ध मन्दिर (श्री शिव मंदिर महंत/पुजारी:- श्री पप्पू बाबा(उर्फ श्री राज कुमार पाण्डेय) कॉलेक्ट्रीट घाट पटना बिहार इंडिया 


श्री पप्पू बाबा जी भगतगणो  को पूजा कराते हुये।
श्री पप्पू बाबा जी भगतगणो  को पूजा कराते हुये।


Sunday, July 9, 2023

सावन का पहला सोमवार 10 जुलाई 2023

 

सावन के पहले सोमवार पर कई शुभ योग, जानें इस दिन का विशेष महत्व  Sawan Somwar 2023:


आपसभी भागतगानो को सावन की पहली सोमवारी
  की  हार्दिक शुभकामनाएं महंत/पुजारी:- श्री पप्पू बाबा(उर्फ श्री राज कुमार पाण्डेय) कॉलेक्ट्रीट घाट पटना बिहार इंडिया 

 सावन का सोमवार कल यानी 10 जुलाई को है। सावन के सोमवार का विशेष महत्व होता है। इस दिन भक्त भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए तरह-तरह के प्रयास करते हैं। पहले सावन सोमवार पर रुद्राभिषेक का समय (Rudrabhishek Timings)

पहले सावन सोमवार पर रुद्राभिषेक का खास संयोग बना है. इस दिन शिववास गौरी के साथ है और रुद्राभिषेक तभी होता है जब शिववास होता है। इस दिन रुद्राभिषेक का शुभ मुहूर्त प्रात: काल से लेकर शाम 06 बजकर 43 मिनट तक है।



पहले सोमवार पर पूजा का शुभ मुहूर्त (Sawan Somwar Puja Ka Shubh Muhurt)

सावन के सोमवार के दिन प्रदोष काल में शिवजी की पूजा करने का विशेष महत्‍व माना गया है। सावन के पहले सोमवार पर शाम की पूजा का शुभ महूर्त शाम को 5 बजकर 38 मिनट से 7 बजकर 22 मिनट तक है। ऐसी मान्‍यता है कि शाम के वक्‍त में रुद्राभिषेक करने से शिवजी सभी कष्‍टों को दूर करते हैं।



सावन सोमवार के दुर्लभ उपाय

शास्त्रों के अनुसार शिव जी को कई तरह के पुष्य प्रिय है लेकिन मान्यता है कि सावन सोमवार की पूजा में शिवलिंग पर कमल के फूल चढ़ाने से व्यक्ति की सोई किस्मत जाग उठती है। सावन सोमवार को प्रदोष काल में ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय इस मंत्र का जाप करते हुए शिवलिंग शिवलिंग पर कमल का पुष्प चढ़ाएं. ये शिव का धनदायक मंत्र है। मान्यता है इस उपाय से गरीबी 7 जन्मों तक छू भी नहीं सकती।



सावन सोमवार की पूजा सामग्री

सावन सोमवार में शिव पूजा के लिए विशेष पूजन सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। इसके लिए कच्चा दूध, गंगाजल, दही, घी, शहद, भांग, धतूरा, शक्कर, केसर, चंदन, बेलपत्र, अक्षत, भस्म, रुद्राक्ष, शमी पत्र, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, फल, कपूर, धूप, दीप, शिव के प्रिय फूल (हरसिंगार, आक, कनेर), इत्र, पंचमेवा, काला तिल, सोमवार व्रत कथा पुस्तक एकत्रित कर लें।



सावन में इस बार आएंगे 8 सोमवार

इस साल अधिकमास लगने के कारण सावन 2 महीने यानी 59 दिनों का होगा और सावन में कुल 8 सोमवार के पड़ेंगे. इसमें केवल 4 सावन सोमवारी के व्रत ही मान्य होंगे।


पहला सावन सोमवार 2023 चौघड़िया मुहूर्त

अमृत (सर्वोत्तम) - सुबह 05.30 - सुबह 07.14
शुभ (उत्तम) - सुबह 08.58 - सुबह 10.42
प्रदोष काल मुहूर्त - रात 07.22 - रात 08.38

सावन का पहला सोमवार कल

कल यानी 10 जुलाई को सावन का पहला सोमवार है. इस दिन भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए भक्त व्रत रखते हैं और पूरी श्रद्धा से उनकी पूजा-अर्चना करते हैं। माना जाता है कि सावन के सोमवार के दिन किए गए उपायों से भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होते हैं।

Lord Shiva: सावन का महीना शंकर भगवान को समर्पित है. भगवान शिव की पूजा के लिए सावन का महीना बेहद खास माना जाता है। इस बार सावन का महीना बहुत ही खास रहने वाला है। इस बार सावन का महीना एक नहीं बल्कि पूरे दो महीने का होने जा रहा है।

सावन का पहला सोमवार 10 जुलाई को है। सावन सोमवार के व्रत में भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा की जाती है. इस साल सावन मास में कुल 8 सावन सोमवार व्रत हैं। 4 सावन सोमवार और 4 सावन अधिक सोमवार व्रत. सावन सोमवार व्रत के दिन भगवान भोलेनाथ की पूजा विधि विधान से की जाती है। जिनको मनचाहे जीवनसाथी की कामना होती है, वे सावन सोमवार व्रत रखते हैं।

सोमवार का व्रत रने से सुख, समृद्धि और उन्नति की मनोकामना पूरी होती है। सावन सोमवार व्रत के कुछ नियम हैं, जिनका पालन करना जरूरी है। यदि आप उन नियमों को नहीं मनाते हैं तो आपका व्रत निष्फल भी हो सकता है। सावन के पहले सोमवार के  दिन बुधादित्य योग का संयोग बन रहा है। सावन को मनोकामना पूर्ति महीना कहा जाता है, क्योंकि त्रिदेव में शिव ही ऐसे देवता है जिनकी सच्चे मन से पूजा की जाए तो वह बेहद जल्द प्रसन्न हो जाते हैं।

सावन सोमवार के दिन शिव पूजा जल्द फलित होती है। वैसे तो शिव जी एक लौटा जल से ही खुश हो जाते हैं लेकिन सावन सोमवार की पूजा में कुछ विशेष सामग्री का इस्तेमाल किया जाए तो मनचाहा वरदान मिलता है।








Sunday, July 2, 2023

#GuruPurnima

 

Guru Purnima 2023 Daan: गुरु पूर्णिमा पर इस बार करें ये उपाय, इन चीजों के दान और गुरु की वंदना से प्राप्त होंगे शुभफल  




Guru Purnima 2023 : हर साल हिंदी के आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली पूर्णिमा तिथि अत्यंत शुभ मानी गई है. सनातन धर्म में इस तिथि को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाने की परंपरा चली आ रही है।

आपसभी भागतगानो  गुरु पूर्णिमा  की  हार्दिक शुभकामनाएं महंत/पुजारी:- श्री पप्पू बाबा(उर्फ श्री राज कुमार पाण्डेय) कॉलेक्ट्रीट घाट पटना बिहार इंडिया 



Guru Purnima Kab hai: 3 जुलाई 2023 को इस साल गुरु पूर्णिमा पड़ रहा है। इस दिन अपने गुरु की पूजा, वंदना करने की परंपरा है। अपने गुरु के प्रति सम्मान भाव भी इस दिन दिखाया जाता है। हमारे जीवन में गुरु का पद बहुत ऊपर होचा है। गुरु ही हैं जो हमें बताते हैं कि हमारे लिए कौन सा पथ सही है और किस रास्ते पर नहीं चलना चाहिए। अत: गुरु को समर्पित तिथि  गुरु पूर्णिमा के दिन उनका आशीर्वाद लेने से उन्नति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। 

गुरु  का आशीर्वाद 

आषाढ़ मास के पूर्णिमा तिथि पर गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है। इस दिन गुरु का आशीर्वाद प्राप्त करने के कई लाभ है। इस दिन गुरु वंदन से जीवन में उन्नति और समृद्धि पाई जा सकती है। इसके अलावा इस शुभ दिन दान का भी बहुत अधिक महत्व बताया गया है। आइए जानते हैं कि किन राशि के जातकों को गुरु पूर्णिमा के मौके पर क्या दान करना चाहिए। जिससे वो अपने जीवन से परेशानियों को दूर कर सकें।

मेष से कर्क 
मेष राशि के जातकों को इस दिन जरुरतमंदों को गुड़ और लाल रंग के कपड़े दान करना चाहिए। आर्थिक परेशानी दूर होंगी।
वृषभ राशि के जातकों को इस दिन मिश्री का दान करना चाहिए।

  
   शुभ होगा मिथुन के राशि के जातकों को गाय को हरा चारा खिलाना। हरे मूंग दान करने से भी दांपत्य जीवन सुखमय होगा।
कर्क के राशि के जातकों को चावल का दान करना चाहिए, तनाव दूर होगा और शुभ फल प्राप्त होगे।

सिंह से वृश्चिक
सिंह के राशि के जातकों गेहूं दान करना चाहिए। मान प्रतिष्ठा बढ़ेगी. 
कन्या के राशि के जातकों को ब्राह्मण को भोजन कराने से लाभ होगा। श्रद्धानुसार दक्षिणा देने से भी लाभ होगा। गाय को चारा दें।
तुला के राशि के जातकों को कन्याओं को खीर खिलाना चाहिए, यश और ऐश्वर्य की प्राप्ती होगी।
वृश्चिक के राशि के जातकों को बंदरों को चना गुड़ खिलाने से लाभ होगा। गरीब छात्रों को पढ़ने लिखने की चीजें दान करें।

 से मीन 
धनु के राशि के जातकों को मंदिर में चना का दान करने से लाभ होगा, घर शांति बनी रहेगी।
मकर के राशि के जातकों को गरीबों को कंबल बांटने से शुभ फल प्राप्त होगा. नौकरी में आ रही परेशानियां दूर होंगी।
कुंभ के राशि के जातकों को वृद्धाश्रम में कपड़े, अनाज और रुपयों का दान करना चाहिए। काली उड़द की दाल को मंदिर में दान करें।
मीन के राशि के जातकों को इस दिन हल्दी और बेसन से बनी मीठी चीजें बच्चों में दान करना चाहिए इससे इच्छापूर्ति होगी।

Saturday, June 3, 2023

#येष्‍ठपूर्णिमा2023

 


आपसभी भागतगानो  येष्‍ठ पूर्णिमा  की  हार्दिक शुभकामनाएं महंत/पुजारी:- श्री पप्पू बाबा(उर्फ श्री राज कुमार पाण्डेय) कॉलेक्ट्रीट घाट पटना बिहार इंडिया 



येष्‍ठ पूर्णिमा कब है, जानें तिथि, महत्‍व और शुभ मुहूर्त 



 Jyestha Purnima Kab ai: ज्‍येष्‍ठ मास की पूर्णिमा का धार्मिक दृष्टि से खास महत्‍व बताया गया है। ज्‍येष्‍ठ पूर्णिमा 4 जून को है और इस दिन धार्मिक कार्य पूजा अनुष्‍ठान, व्रत करने और दान पुण्‍य करने का विशेष महत्‍व होता है। कुछ स्‍थानों पर वट सावित्री व्रत भी ज्‍येष्‍ठ पूर्णिमा को रखा जाता है। महिलाएं पति की दीर्घायु के लिए व्रत करती हैं और बरगद के पेड़ की पूजा करके प्रार्थना करती हैं। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने और दान करने से मनुष्‍यों को शुभ फलों की प्राप्ति होती है। आइए आपको बताते हैं ज्‍येष्‍ठ पूर्णिमा की तिथि, महत्‍व और शुभ मुहूर्त। ज्‍येष्‍ठ पूर्णिमा की तिथि और शुभ मूहूर्त

ज्‍येष्‍ठ पूर्णिमा इस साल दो दिन की पड़ रही है। यानी कि ज्‍येष्‍ठ पूर्णिमा का व्रत 3 जून को रखा जाएगा और स्‍नान और दान 4 जून को किया जाएगा। पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 3 जून को सुबह 11 बजकर 16 मिनट पर आरंभ होगी और उसका समापन 4 जून को होगा। चूंकि पूर्णिमा तिथि चंद्र द्रेव को सम‍र्पित होती है इसलिए इसकी पूजा भी चंद्रोदय की गणना के अनुसार होती है।

ज्‍येष्‍ठ पूर्णिमा का महत्‍व



ज्‍येष्‍ठ पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्‍नान के साथ ही इस दिन भगवान सत्यनारायण की कथा सुनने का भी विशेष महत्‍व होता है। मान्‍यता है कि इस दिन चंद्र देव के साथ ही मां लक्ष्‍मी की आराधना भी की जाती है। रात्रि में चंद्रमा को दूध से अर्घ्‍य देने से आपके घर में धन धान्‍य की वृद्धि होती है और हर प्रकार के रोगों से राहत मिलती है। ज्‍येष्‍ठ पूर्णिमा की पूजाविधि

ज्‍येष्‍ठ पूर्णिमा पर भगवान विष्‍णु की पूजा करना भी शुभ माना जाता है। वहीं शाम के पहर में मां लक्ष्‍मी और रात को चंद्र देव की पूजा की जाती है। भगवान विष्‍णु की पीले फूल, फल और पीले चावल के साथ विधि विधान से पूजा करें। उसके बाद शाम को मां लक्ष्‍मी की पूजा करके केसर की खीर का भोग लगाएं। रात को इस चंद्र देव को दूध से अर्घ्‍य देना चाहिए और दीपक जलाना चाहिए। इस दिन महिलाएं बरगर के पेड़ की पूजा भी करती हैं और उसके चारों ओर परिक्रमा करके कलावा बांधती हैं। इस दिन ब्राह्माणों को भोजन और वस्‍त्र का दान करना चाहिए।

Monday, May 29, 2023

#GangaDussehra

      Ganga Dussehra 2023: 

 

आपसभी भागतगानो को गंगा दसहरा महापर्व की  हार्दिक शुभकामनाएं महंत/पुजारी:- श्री पप्पू बाबा(उर्फ श्री राज कुमार पाण्डेय) कॉलेक्ट्रीट घाट पटना बिहार इंडिया 

गंगा दशहरा पर राशिनुसार करें इन चीजों का दान, मिलेगा लाभ



Ganga Dussehra 2023: 

गंगा दशहरा पर मां गंगा की पूजा करने से उनकी असीम कृपा प्राप्त होती है। इस पावन मौके पर पतित पावनी गंगा में आस्था की डुबकी लगाने से साधक को 10 हजार पापों सो मुक्ति मिलती है। कहते हैं कि इस दिन राशिनुसार चीजें दान करने से भी बड़ा लाभ मिलता हैं।

Ganga Dussehra 2023: गंगा दशहरा का पर्व 30 मई 2023 को है और सनातन धर्म में गंगा दशहरा का त्योहार काफी महत्व रखता है। पौराणिक कथा के अनुसार, गंगा दशहरा मां गंगा के स्वर्ग से धरती पर आने का दिन है। गंगा दशहरा पर मां गंगा की पूजा करने से उनकी असीम कृपा प्राप्त होती है। इस पावन मौके पर पतित पावनी गंगा में आस्था की डुबकी लगाने से साधक को 10 हजार पापों सो मुक्ति मिलती है. कहते हैं कि इस दिन राशिनुसार चीजें दान करने से भी बड़ा लाभ मिलता है।

गंगा दशहरा पर राशिनुसार करें इन चीजों का दान

मेष- मेष राशि के लोग दिन तिल और कपड़े का दान करें।


वृषभ- वृषभ राशि वाले गरीबों को खाना और धन का दान करें।
मिथुन- मिथुन राशि वालों के लिए पानी का दान करना शुभ रहेगा।

कर्क- कर्क राशि के जातक पीले फलों का दान कर सकते है।

सिंह- सिंह राशि वाले तांबे के बर्तन या अनाज और किसी भी फल का दान कर सकते हैं।
कन्या- कन्या राशि के लोग बेलपत्र का दान करें तो लाभ मिलेगा।

तुला- तुला राशि वाले सतनाजा का दान कर सकते हैं।
वृश्चिक- वृश्चिक राशि वालों को मौसमी फलों का दान करना चाहिए।
धनु- धनु राशि के लोग काले तिल का दान कर सकते हैं


मकर- मकर राशि वाले मिट्टी के घड़े दान करने से लाभ पाएंगे।
कुंभ- कुंभ राशि वाले खाने की कोई भी सामग्री दान कर सकते हैं.
मीन- मीन राशि वाले पानी का दान करें तो उत्तम होगा। गंगा दशहरा 2023 मुहूर्त

ज्येष्ठ माह की दशमी तिथि 29 मई 2023 दिन सोमवार को सुबह 11 बजकर 49 मिनट से प्रारंभ होगी और इसका समापन 30 मई दिन मंगलवार को दोपहर 01 बजकर 07 मिनट पर होगा. उदया तिथि के चलते गंगा दशहरा का पर्व 30 मई को मनाया जाएगा।

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