Monday, August 29, 2022

प्राचीन श्री गौरी शिव शंकर मनोकामना सिद्ध मंदिर (श्री शिव मंदिर) कलेक्ट्रीट घाट पटना बिहार भारत

हरितालिका तीज का व्रत 30 अगस्त 2022: 



प्राचीन श्री गौरी शिव शंकर मनोकामना सिद्ध मंदिर (श्री शिव मंदिर)

 आप सभी भक्तगणों महिलाओं को तीज की हार्दिक शुभकामनाएँ 

मंहत/पुजारी:- श्री पप्पू बाबा कलेक्ट्रीट घाट पटना बिहार भारत



Hartalika Teej 2022 Vrat Vidhi Upay: हरितालिका तीज का व्रत जीवनसाथी को लेकर बहुत अहम होता है। सुखद वैवाहिक जीवन और अच्‍छा पति पाने के लिए महिलाएं-लड़कियां यह व्रत करती हैं।
Hartalika Teej 2022 Vrat Vidhi Upay in Hindi: 

भाद्रपद महीने के शुक्‍ल पक्ष की तृतीया को हरितालिका तीज व्रत रखा जाता है। इस साल 30 अगस्‍त 2022, मंगलवार को रखा जाएगा। इस दिन भगवान शंकर-पार्वती की पूजा की जाती है। यह व्रत सुहागिन महिलाएं और कुंवारी लड़कियां दोनों ही करती हैं। यह व्रत पति को लंबी उम्र देता है, मनपसंद पति देता है और जीवन में सुख-समृद्धि लाता है। ऐसे लोग जिनके विवाह में बार-बार बाधाएं आ रही हैं या उनका किसी से बार-बार रिश्‍ता टूट (ब्रेकअप) रहा है, वे लोग इस दिन कुछ खास उपाय करें. इससे जल्‍द ही उन्‍हें अच्‍छा जीवनसाथी मिलेगा। हरितालिका तीज के उपाय

हरितालिका तीज के दिन निर्जला व्रत करें और भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा विधि-विधान से करें। इस दौरान शिवजी को बेल पत्र, धतूरा, आक के फूल और सफेद वस्त्र चढ़ाएं। वहीं देवी पार्वती को लाल वस्त्र और श्रृंगार सामग्री चढ़ाएं। ऐसा करने से जल्‍द विवाह होता है और अच्‍छा जीवनसाथी मिलता है। हरतालिक तीज पर पूजा करने के बाद देवी पार्वती की आरती- 'जय-जय गिरिराज किशोरी...' जरूर करें. धर्म-शास्‍त्रों के मुताबिक माता सीता ने अपने स्‍वयंवर से पहले ये आरती की थी और उन्‍हें इसके प्रभाव से प्रभु श्रीराम जैसा योग्य वर मिला. हो सके तो रोज ही देवी पार्वती की पूजा और ये आरती करें. इससे बहुत जल्‍दी अच्‍छे व्‍यक्ति से विवाह होगा।

ह‍रतालिका तीज के दिन किसी सुहागन को श्रृंगार की चीजें जरूर भेंट करें।

हरतालिका तीज के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का केसर मिश्रित गाय के दूध से अभिषेक करें।इस दौरान ॐ नमः मनोभिलाषितं वरं देहि वरं ह्रीं ॐ गोरा पार्वती देव्यै नमः मंत्र का जाप करते रहें. इससे जल्‍द ही सारी बाधाएं दूर होंगी और शहनाइयां बजेंगी।

Wednesday, August 10, 2022

प्राचीन श्री गौरी शिव शंकर मनोकामना सिद्ध मंदिर (श्री शिव मंदिर)

 प्राचीन श्री गौरी शिव शंकर मनोकामना सिद्ध मंदिर (श्री शिव मंदिर)

  आप सभी भक्तगणों को रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएँ 

मंहत/पुजारी:- श्री पप्पू बाबा कलेक्ट्रीट घाट पटना बिहार भारत




Raksha Bandhan 2022 Kab Hai: रक्षाबंधन सावन की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है और इस बार पूर्णिमा तिथि 11 और 12 अगस्त दोनों दिन है, लेकिन 11 और 12 अगस्त में से राखी के लिए कौन सा दिन शुभ है क्योंकि इस साल रक्षाबंधन पर भद्रा का साया भी पड़ रहा है. ये भी जानना जरूरी है कि रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त कितने बजे से कितने बजे तक है. 

Raksha Bandhan 2022 Date: हर साल रक्षाबंधन का पर्व श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है. इस साल की पूर्णिमा तिथि 11 अगस्त को शुरू हो जाएगी. 

11 अगस्त 2022 को पूर्णिमा तिथि 10 बजकर 37 मिनट पर शुरू होकर 12 अगस्त को सुबह 07 बजकर 06 मिनट पर समाप्त होगी. लेकिन कुछ लोगों का कहना है कि 11 अगस्त को... 
अगस्त को भद्रा है और उदया तिथि में पूर्णिमा नहीं है इसलिए रक्षाबंधन 12 अगस्त को ही मनेगी. लेकिन लोग कई और जरूरी बातों को नजरअंदाज कर रहे हैं. पंडितों ... का कहना है कि इस बार 11 अगस्त को भद्रा होने के बावजूद बहनें भाइयों को राखी बांध सकती हैं. आइए जानते हैं इसके पीछे का कारण. 

रक्षाबंधन पर भद्रा रहेगी या नहीं? (Raksha Bandhan 2022 Tithi & Bhadra Timing)

श्री पप्पू बाबा के मुताबिक, शास्त्रों के अनुसार दूसरे दिन भी अगर पूर्णिमा यानी उदयातिथि के दिन है और उस दिन अगर पूर्णिमा तीन मुहूर्त तक है तो 

हमें दूसरे दिन रक्षाबंधन मनाना चाहिए. लेकिन अगर त्रिमुहूर्त व्यापनी दिन तक नहीं है तो अगले दिन राखी नहीं मनानी चाहिए. इस हिसाब से 11 अगस्त को को रक्षाबंधन मनाया जाना चाहिए. 


इस बार 11 अगस्त को रक्षाबंधन पर भद्रा का साया है. पहले ये जानना जरूरी है कि भद्रा क्या है? भद्रा समय का नाम है, जिसमें कोई भी शुभ कार्य नहीं करते हैं.... 


ऐसी मान्यता है कि उस समय अगर आप कुछ अच्छा काम करते हैं तो उस समय वह कार्य खराब हो जाता है. इस बार जिस समय पूर्णिमा तिथि लग रही है, उसी समय भद्रा की शुरूआत भी हो जाएगी.  शास्त्रों के अनुसार श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को दोपहर में राखी बांधनी चाहिए, लेकिन दोपहर में अगर भद्रा हो तो उस समय राखी नहीं बांधनी चाहिए. 
इस बार भद्रा 11 अगस्त को 10 बजकर 37 मिनट पर शुरू होगी और रात 08 बजकर 53 मिनट तक रहेगी.  

11 अगस्त को चंद्रमा मकर राशि में होगा और भद्रा पाताल लोक में होगी. भद्रा का प्रभाव इसलिए पृथ्वी पर ज्यादा नहीं पड़ रहा है. अगर कोई 11 अगस्त को जल्दी 

राखी बांधना चाहता है तो वह लोग राखी भद्रा पूंछ काल में बांध सकते हैं. भद्रा पूंछ काल का समय 11 अगस्त शाम को 05 बजकर 18 मिनट से 06 बजकर 20 मिनट तक रहेगा. 


भद्रा मुख के समय राखी बांधना शुभ नहीं माना जाता है. इसका समय शाम को 06 बजकर 20 मिनट से रात 08 बजकर 05 मिनट तक रहेगा. 


रक्षाबंधन 2022 पर राखी बांधने का शुभ मुहूर्त ((Raksha Bandhan 2022 Shubh Muhurat)

रक्षाबंधन पर 11 अगस्त की दोपहर 12 बजे से 12 बजकर 53 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा.  इस 53 मिनट के शुभ मुहूर्त में आप भाई की कलाई पर राखी बांध सकेंगी.  



दोपहर के वक्त 02 बजकर 39 मिनट से लेकर 03 बजकर 32 मिनट तक विजय मुहूर्त रहेगा. इस शुभ मुहूर्त में भी भाई को राखी बांध सकती हैं.


11 अगस्त को जब रात 08 बजकर 53 मिनट पर भद्रा समाप्त हो जाएगी, उसके बाद आप रात 9 बजकर 50 मिनट तक राखी बांध सकते हैं क्योंकि रात 08 बजकर 53 मिनट से रात 9 बजकर 50 मिनट तक प्रदोष काल रहेगा. वह समय भी राखी बांधने के लिए शुभ रहेगा.  

चूंकि कुछ इलाकों में परंपरा है कि उदयातिथि में ही रक्षाबंधन मनाते हैं.  
अगर 12 अगस्त को आप राखी मनाना चाहते हैं तो सुबह 7 बजे तक राखी बांधनी है.  

Thursday, August 4, 2022

हर हर महादेव

 🕉 हर हर महादेव 🕉

प्राचीन श्री गौरी शिव शंकर मनोकामना सिद्ध मंदिर (श्री शिव मंदिर) मंहत/पुजारी:- श्री पप्पू बाबा कलेक्ट्रीट घाट पटना बिहार भारत



मंदिर में धूप - दिप और भगवान देव में देव एक देव  महादेव बोले नाथ को भोग लगाने में परेशानी हो रही है।


बोलेनाथ के भगतगणों से अनुरोध है कि मंदिर में आ कर दान करें।
मंहत/पुजारी:- श्री पप्पू बाबा
कलेक्ट्रीट घाट पटना बिहार भारत

            Donate Now Google Pay QR                                     Donate Now USA 

                                                             















Sunday, July 17, 2022

🕉 हर हर महादेव  🕉
सावन के पहले सोमवार पर बन रहा दुर्लभ योग, व्रत रखने से पहले जान लें ये जरूरी बातें।

Shravan Somvar Vrat 2022: सावन महीने की शुरुआत 14 जुलाई से हो गई है। प्राचीन श्री गौरी शिव शंकर मनोकामना सिद्ध मंदिर (श्री शिव मंदिर) मंहत/पुजारी:- श्री पप्पू बाबा कॉलेक्ट्रीट घाट पटना इंडिया



सभी प्रसिद्ध शिवालयों में भक्तों का तांता लगा हुआ है। इन दिनों भगवान शिव के मंदिर में हर हर महादेव और बम बम भोले का जयघोष हो रहा है. वैसे तो सावन के पूरे महीने किसी भी दिन शिवलिंग पर जल चढ़ाने का महत्व है, लेकिन सावन महीने में पड़ने वाले सोमवार के दिन शिवजी के पूजा करने और रुद्राभिषेक करने का अपना अलग ही महत्व है। इस बार सावन का पहला सोमवार 18 जुलाई को पड़ रहा है। इस दिन बहुत दुर्लभ शोभन योग बन रहा है। मान्यता है कि शोभन योग में शिव जी की पूजा करता है उस पर भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त होती है। आइए जानते हैं सावन के पहले सोमवार को कैसे करें शिव जी पूजा और क्या है इसका महत्व?   

सावन सोमवार व्रत रखने के लिए करें ये उपाय

 यदि आप सावन सोमवार का व्रत रखते हैं तो पहले सोमवार को व्रत रखते समय चारो सोमवार व्रत का संकल्प लें. सावन सोमवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और आस-पास के शिव मंदिर में जाएं।

भगवान शिव को अक्षत, सफेद, फूल, चंदन, भांग, धतूरा, गाय के दूध, धूप, दीप, पंचामृत, सुपारी और बेलपत्र आदि अर्पित करें।

शिवलिंग पर दूध या जल से अभिषेक करते समय ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें।

सोमवार के दिन पूजा के अंत में अपनी सभी तरह की मनोकामना की पूर्ति के लिए भगवान शिव से प्रार्थना करें और शिव चालीसा का पाठ कर उनकी आरती करें.  सावन सोमवार व्रत महत्व

सावन का महीना शिव जी का प्रिय महीना होता है। ऐसी मान्यता है कि जो लोग सावन के महीने में मां पार्वती ने कठोर तप करके भगवान शिव को प्राप्त किया था. सावन के महीने में जो भक्त सोमवार का व्रत रखकर भगवान शिव का विधि विधान से पूजा और जलाभिषेक करते हैं उन पर भगवान भोले प्रसन्न होते हैं और उनकी हर मनोकामना पूर्ण होती है. इतना ही शादी योग्य लड़कियां यदि सावन महीने में सोमवार का व्रत रख कर यदि मां पार्वती और भोले शंकर की उपासना करती हैं तो उनके मनवांछित वर की प्राप्ति होती है।

जानिए किसे नहीं रखना चाहिए सावन सोमवार का व्रत

हम सभी लोग भगवान शिव श्रद्धानुसार सावन का व्रत रखकर भगवान शिव की पूजा करते हैं, लेकिन वहीं जो व्यक्ति बीमार या कमजोर हों उन्हें सोमवार का व्रत नहीं रखना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को भी इस दौरान व्रत न रखने की छूट होती है। ऐसे लोग भगवान शिव की पूजा अराधना करने के बाद भोजन कर सकते हैं। बता दें कि शरीर को कष्ट देकर व्रत नहीं रखना चाहिए यदि संभव हो शरीर साथ दे तभी व्रत रखना चाहिए। यदि आप व्रत रखने में सक्षम नहीं हैं तो सावन सोमवार को सुबह स्नान कर भगवान शिव पर जलाभिषक कर विधि विधान से पूजा करने के पश्चात अन्न ग्रहण कर सकते हैं।


 

Monday, June 13, 2022

Jyeshtha Purnima 14 June 2022:


धन प्राप्ति के लिए बेहद खास है कल का दिन, कर लें ये उपाय! एक साल तक नहीं मिलेगा मौका।

 Jyeshtha Purnima Upay 2022: धनवान बनने के लिए और जीवन में अपार सुख-समृद्धि पाने के लिए ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा बहुत महत्‍वपूर्ण है। इस दिन धन प्राप्ति के लिए किए गए उपाय तेजी से असर दिखाते हैं। 

Dhan Prapti ke Upay: ज्‍येष्‍ठ पूर्णिमा कल यानी कि 14 जून 2022, मंगलवार को है। इसे वट पूर्णिमा भी कहते हैं। इस दिन महिलाएं अखंड सौभाग्‍य के लिए बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं। साथ ही इस दिन मां लक्ष्‍मी की पूजा करने और स्‍नान-दान करने की परंपरा है। इसके अलावा इस ज्‍येष्‍ठ पूर्णिमा पर कुछ विशेष संयोग बन रहे हैं, जिसके कारण इसका महत्‍व और ज्‍यादा बढ़ गया है। कल पूर्णिमा के दिन बड़ा मंगल भी है और शुभ नाम का खास योग भी बन रहा है।
ये उपाय दिलाएंगे मां लक्ष्‍मी की अपार कृपा मां लक्ष्‍मी की कृपा पाने के लिए ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा तिथि को मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करना चाहिए। साथ ही इस दिन किए गए कुछ खास उपाय बहुत तेजी से असर दिखाते हैं, इसलिए जल्‍दी अमीर बनने का सपना देख रहे लोगों को ये उपाय कर लेने चाहिए।




- पूर्णिमा की रात मां लक्ष्‍मी के सामने लाल रंग के कपड़े पर 11 कौड़ियां रखें, फिर इन सभी पर हल्‍दी का टीका लगाएं। रात भर उन्‍हें इसी तरह रखा रहने दें। इसके बाद दूसरे दिन मां लक्ष्‍मी को प्रणाम करके इन कौड़ियों को तिजोरी या धन स्‍थान पर रख दें। ऐसा करने से आपके जीवन में कभी भी पैसों की कमी नहीं होगी. आपकी आय तेजी से बढ़ेगी।

- मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए पूर्णिमा के दिन लक्ष्‍मी जी की पूजा के बाद खीर का भोग लगाएं. साथ ही 5 कन्‍याओं को भोजन कराएं, यदि यह संभव न हो तो उन्‍हें खीर अवश्‍य खिलाएं. ऐसा करने से मां लक्ष्‍मी आप पर हमेशा मेहरबान रहेंगी।
 - खूब सारा पैसा कमाने के लिए लक्ष्मी स्तोत्र और कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें. ऐसा करने से घर और कामकाज में हमेशा बरकत बनी रहती है।

 यदि पैसों की तंगी के चलते कर्जदार हो गए हैं तो कर्ज से निजात पाने के लिए ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करके मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करें। मां लक्ष्‍मी को सुगंधित धूप, गुलाब के फूल और खीर अर्पित करें। ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन पीपल के पेड़ की पूजा करने से मां लक्ष्‍मी प्रसन्‍न होती हैं। इसके अलावा ब्रह्मा, विष्‍णु और महेश की कृपा भी मिलती है। हो सके तो शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे दीपक भी जलाएं। इस दिन सफेद चीजों जैसे दूध, शक्‍कर और सफेद कपड़ों का दान करें।

Tuesday, June 7, 2022

9 जून 2022 को गंगा दशहरा पर बन रहे हैं 4 शुभ योग, गंगा स्नान से दूर होंगे 10 पाप 


गंगा दशहरा (Ganga Dussehra) 09 जून दिन गुरुवार को मनाया जाएगा. इस दिन गजकेसरी और महालक्ष्मी योग के साथ चार शुभ योग भी बन रहे हैं. इस दिन गंगा स्नान से 10 पाप भी मिटते हैं.



गंगा दशहरा (Ganga Dussehra) 09 जून दिन गुरुवार को मनाया जाएगा. इस वर्ष गंगा दशहरा पर चार शुभ योग बन रहे हैं, जो इस दिवस को और भी महत्वपूर्ण बना रहे हैं. ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को हस्त नक्षत्र में मां गंगा का पृथ्वी लोक पर अवतरण हुआ था. उनके पृथ्वी पर आने से राजा भगीरथ के पूर्वजों को मोक्ष प्राप्त हुआ.

गंगा स्नान से मिटेंगे 10 पाप


प्राचीन श्री गौरी शिव शंकर मनोकामना सिद्ध मंदिर (श्री शिव मंदिर) महंत/पुजारी:- श्री पप्पू बाबा (उर्फ श्री राज कुमार पाण्डेय) कॉलेक्ट्रीट घाट   बाबा जी कहते हैं कि गंगा दशहरा के दिन पवित्र गंगा नदी में स्नान करने मात्र से ही 10 प्रकार के पाप मिट जाते हैं. इसमें 3 दैहिक पाप, 3 मानसिक पाप और 4 प्रकार के वाणी से जुड़े पाप होते हैं. वे सब मां गंगा की कृपा से मिट जाते हैं. इस पावन अवसर पर सभी लोगों को गंगा स्नान करना चाहिए.


गंगा दशहरा पर 4 शुभ योग

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, ज्येष्ठ शुक्ल दशमी तिथि 09 जून को प्रात: 08:21 बजे से लेकर 10 जून को प्रात: 07:25 बजे तक है. गंगा दशहरा पर रवि योग के साथ गज केसरी और महालक्ष्मी योग भी बन रहा है, साथ ही हस्त्र नक्षत्र भी है. गंगा दशहरा पर मंगल, गुरु और चंद्रमा के कारण गजकेसरी और महालक्ष्मी योग बन रहा है. दूसर ओर सूर्य एवं बुध की वृष राशि में साथ होने से बुधादित्य योग का निर्माण हो रहा है. रवि योग पूरे दिन है और हस्त नक्षत्र सुबह 04:31 बजे से लेकर 10 जून को सुबह 04:26 बजे तक है.

गंगा दशहरा पर बने इन चार शुभ योगों में स्नान और दान करने से पुण्य फल प्राप्त होता है. मां गंगा की कृपा से व्यक्ति को मृत्यु के बाद मोक्ष प्राप्त होता है.



गंगा दशहरा पर मिलेगी शिव और विष्णु कृपा

गंगा भगवान शिव और श्रीहरि विष्णु दोनों को ही प्रिय हैं. गंगा दशहरा के अवसर पर आप मां गंगा के साथ भगवान विष्णु और भगवान भोलेनाथ की पूजा करके दोनों देवों की कृपा प्राप्त कर सकते हैं.

Sunday, May 15, 2022

 Vaishakh Purnima 2022: वैशाख पूर्णिमा आज, जानिए इस दिन का महत्व, पूजाविधि और दान का फल  

पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने का विशेष महत्त्व माना गया है। इसके चलते हज़ारों श्रद्धालु पवित्र तीर्थ स्थलों में स्नान और दान कर पुण्य अर्जित करते हैं। 



Vaishakh Purnima 2022 : धर्मग्रंथों के अनुसार वैशाख मास की पूर्णिमा को वैशाखी पूर्णिमा,पीपल पूर्णिमा या बुद्ध पूर्णिमा कहा जाता है। इस बार माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु को समर्पित यह पूर्णिमा 16 मई,सोमवार की है। यह पूर्णिमा और भी खास इसलिए है क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु के अवतार महात्मा बुद्ध को पवित्र तीर्थ स्थान बोधगया में बोधि वृक्ष के नीचे बुद्धत्व की प्राप्ति हुई थी। वैशाख पूर्णिमा का 

महत्व

पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने का विशेष महत्त्व माना गया है। इसके चलते हज़ारों श्रद्धालु पवित्र तीर्थ स्थलों में स्नान और दान कर पुण्य अर्जित करते हैं। इस दिन श्रद्धा भक्ति के साथ स्नान के जल में नर्मदा या गंगाजल मिलाकर पुण्य लाभ लिया जा सकता है। वैशाख के शुक्ल पक्ष त्रयोदशी से लेकर पूर्णिमा तक की तिथियां पुष्करणी कही गई हैं,ये बड़ी पवित्र और शुभकारक हैं और सब पापों का क्षय करने वाली हैं। इनमें स्नान,प्रभु का ध्यान एवं दान-पुण्य करने से पूरे माह स्नान का फल मिल जाता है । नारद पुराण में उल्लेख है कि वैशाख मास की एकादशी तिथि को अमृत प्रकट हुआ,द्वादशी को भगवान विष्णु ने उसकी रक्षा की,त्रयोदशी को श्रीविष्णु ने देवताओं को सुधापान कराया तथा चतुर्दशी को देवविरोधी दैत्यों का संहार किया और वैशाख की पूर्णिमा के दिन ही समस्त देवताओं को उनका साम्राज्य प्राप्त हो गया। अतः देवताओं ने प्रसन्न होकर इन तीन तिथियों को वर दिया -'वैशाख मास की ये तीन शुभ तिथियां मनुष्य के समस्त पापों का नाश करने वाली तथा सब प्रकार के सुख प्रदान करने वाली हों'। महीने भर नियम निभाने में असमर्थ प्राणी यदि उक्त तीन दिन भी कामनाओं का संयम कर सके तो उतने से ही पूर्ण फल को पाकर भगवान विष्णु के धाम में आनंद का अनुभव करता है। जो मनुष्य वैशाख मास में अंतिम तीन दिन गीता का पाठ करता है,उसे प्रतिदिन अश्वमेघ यज्ञ का फल प्राप्त होता है। जो पूर्णिमा के दिन भगवान सत्यनारायण की कथा करते हैं उन्हें भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त होती है।

पूजा-विधि

इस दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर नदी या घर में स्न्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। ईशान कोण में एक चौकी पर लाल,श्वेत या पीला वस्त्र बिछाकर उस पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें एवं पूजा करने के लिए पूर्व की ओर मुख करके बैठ जाएं। पूजा में पंचामृत,फल,पुष्प,पंचमेवा,कुमकुम केसर, नारियल,अक्षत व पीतांबर का प्रयोग करें। पूर्णिमा को सहस्त्रनामों के द्वारा भगवान मधुसूदन को दूध से नहलाकर मनुष्य पापहीन वैकुण्ठ धाम में जाता है। भगवान विष्णु को तुलसी पत्र डालकर भोग लगाएं। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें। सुख-शांति के लिए इस दिन पीपल के वृक्ष एवं चंद्रदेव को भी जल अर्पित करना चाहिए।

दान का फल

इस दिन जल से भरा हुआ कलश,छाता ,जूते,पंखा,सत्तू,पकवान,फल आदि दान करना चाहिए। वैशाख पूर्णिमा के दिन किया गया दान गोदान के समान फल देने वाला होता है।

Mantra for Study: पढ़ाई में नहीं लगता मन, तो करें इन सरल मंत्रों का जाप, विद्यार्थियों के लिए है बेहद चमत्कारी

    Mantra  for  Study: पढ़ाई में नहीं लगता मन, तो करें इन सरल मंत्रों का जाप, विद्यार्थियों के लिए है बेहद चमत्कारी सार Mantra For Study Co...