Friday, February 17, 2023

महाशिवरात्रि

 प्राचीन श्री गौरी शिव शंकर मनोकामना सिद्ध मन्दिर (श्री शिव मन्दिर)

18 फरवरी को महाशिवरात्रि, आपको पूजा कब करनी है सुबह, दोपहर या रात? देखें शिव पूजा शुभ मुहूर्त


आपसभी भगतगणो को महाशिवरात्रि पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं महंत/पुजारी:- श्री पप्पू बाबा(उर्फ श्री राज कुमार पाण्डेय) कॉलेक्ट्रीट घाट पटना बिहार इंडिया

Shivratri Puja Time 2023: महाशिवरात्रि की तारीख 18 फरवरी 2023 है। यदि आप महाशिवरात्रि का व्रत कर रहेंगे  और भगवान शिव की पूजा करेंगे तो आपको महाशिवरात्रि के पूजा मुहूर्त को जान लेना चाहिए। महाशिवरात्रि पर्व के पूरे दिन के शिव पूजा के शुभ मुहूर्त रहत है।  महाशिवरात्रि की तारीख 18 फरवरी 2023 है। इस दिन प्रदोष व्रत और महाशिवरात्रि व्रत साथ हैं। यदि आप महाशिवरात्रि का व्रत रहेंगे और भगवान शिव की पूजा करेंगे तो आपको महाशिवरात्रि के पूजा मुहूर्त को जान लेना चाहिए। कॉलेक्ट्रीट घाट के महंत/पुजारी:- श्री पप्पू बाबा उर्फ श्री राज कुमार पाण्डेय जी ने कहा महाशिवरात्रि पर्व के पूरे दिन के शिव पूजा के शुभ मुहूर्त है। आप अपनी सुविधानुसार सुबह, दोपहर या रात में कभी भी पूजा कर सकते हैं। महाशिवरात्रि 2023 शिव पूजा मुहूर्त सुबह
18 फरवरी को सुबह 08:22 से सुबह 09:46  तक महाशिवरात्रि की शिव पूजा का अच्छा मुहूर्त है। यह शुभ-उत्तम मुहूर्त है। महाशिवरात्रि 2023 शिव पूजा मुहूर्त
दोपहर में शिव जी की पूजा का शुभ मुहूर्त 12:35 दोपहर से लेकर शाम 04:49 शाम तक है। इसमें भी दोपहर 02:00 दोपहर से 03:24 दोपहर तक लाभ-उन्नति मुहूर्त और दोपहर 03:24 दोपहर से शाम 04:49 संध्या तक अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त है।


महाशिवरात्रि 2023 शिव पूजा मुहूर्त

रात में शिव पूजा का मुहूर्त शाम 06:13 शाम से रात 09:24 रात्रि तक है। जिसमें शाम 07:49 शाम तक लाभ-उन्नति मुहूर्त है। उसके बाद रात 09:24 रात्रि से देर रात 12:35 रात्रि तक शिव पूजा का रात्रि मुहूर्त है। इसमें भी 10:59 रात्रि तक शुभ-उत्तम मुहूर्त और 10:59  से देर रात 12:35 मध्य रात्रि तक अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त है। महाशिवरात्रि 2023 निशिता शिव पूजा मुहूर्त
निशिता पूजा तंत्र मंत्र की सिद्धियों के लिए करते हैं। महाशिवरात्रि की निशिता पूजा मुहूर्त रात 12:09 मध्य रात्रि से लेकर देर रात 01:00 रात्रि तक है।

महाशिवरात्रि 2023 तिथि मुहूर्त
फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि की शुरूआत: 18 फरवरी, रात 08:02  से फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि की समाप्ति: 19 फरवरी, शाम 04:18 संध्या समय

महाशिवरात्रि पर पांच शुभ योग
इस साल महाशिवरात्रि पर पांच शुभ योग केदार, वरिष्ठ, सर्वार्थ सिद्धि, शंख और शश बने हैं। सर्वार्थ सिद्धि योग 05:42 सुबह से लेकर अगले दिन 19 फरवरी को 06:56 सुबह तक है।

Wednesday, January 25, 2023

26 जनवरी बसंत पंचमी 2023

        26 जनबरी बसंत पंचमी पूजा 2023

प्राचीन श्री गौरी शिव शंकर मनोकामना सिद्ध मन्दिर (श्री शिव मन्दिर) 


आपसभी भगतगणो को 
बसंत पंचमी पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं महंत/पुजारी:- श्री पप्पू बाबा(उर्फ श्री राज कुमार पाण्डेय) कॉलेक्ट्रीट घाट पटना बिहार इंडिया

Basant Panchami 2023: कब है बसंत पंचमी, जानें सरस्वती पूजा की तारीख और शुभ मुहूर्त


Basant Panchami 2023: माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी यानी सरस्वती पूजा मनाई जाती है। आइए पंचांग के अनुसार जानते हैं बसंत पंचमी यानी सरस्वती पूजा के लिए शुभ मुहूर्त और पूजन विधि, महत्व।

Basant Panchami 2023: बसंत पंचमी का पर्व हर साल माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस पावन अवसर पर विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा-अर्चना की जाती है। हिंदू धर्म शास्त्रों में ऐसा कहा गया है कि मां सरस्वती की पूजा करने से विद्धा, बुद्धि और ज्ञान की प्राप्ति होती है। यही वजह है कि इस दिन विद्यार्थी वर्ग पूरे मनोभाव से मां सरस्वती की पूजा करते हैं. साल 2023 में भी बसंत पंचमी माघ शुक्ल पंचमी को ही मनाई जाएगी। आइए जानते हैं कि बसंत पंचमी यानी सरस्वती पूजा के लिए शुभ तिथि और मुहूर्त क्या है।  बसंत पंचमी 2023 शुभ मुहूर्त माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी मनाई जाती है। पौराणिक धार्मिक मान्यता है कि बसंत पंचमी के मां सरस्वती का प्राकट्य था। यही वजह है कि इस दिन मां सरस्वती की पूजा अर्चना की जाती है. पंचांग के अनुसार, इस साल बसंत पंचमी का पर्व 26 जनवरी 2023 को मनाया जाएगा। बसंत पंचमी का शुभ मुहूर्तमाघ मास की पंचमी तिथि यानी बसंत पंचमी का आरंभ 25 जनवरी को 12 बजकर 35 मिनट से हो रहा है। वहीं इस तिथि का समापन 26 जनवरी को 10 बजकर 29 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, बसंत पंचमी 26 जनवरी को मनाई जाएगी। हिंदू धर्म शास्त्रों में बसंत पंचमी को श्री पंचमी, मधुमास और ज्ञान पंचमी का नाम दिया गया है। पौराणिक मान्यता है कि इस दिन से बसंत ऋतु का आगाज हो जाता है. इसके साथ ही मान्यता यह भी है कि बसंत पंचमी के बाद बाद ठंढ़ समाप्त हो जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन ज्ञान, संगीत की देवी की पूजा करने से व्यक्ति की बुद्धि तीव्र होती है। इसके अलावा इस दिन किसी मांगलिक कार्य की शुरुआत करना भी काफी शुभ माना जाता है। सरस्वती पूजा के दिन विद्या आरंभ करवाना भी शुभ माना जाता है।

कामदेव और देवी रति की पूजा 

बसंत पंचमी के दिन सुबह जल्दी स्नान करके पीले वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूरे विधि-विधान से विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा करें। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन कामदेव और देवी रति की पूजा करना शुभ होता है। शास्त्रों में इस दिन का ऐसा विधान भी बताया गया है। मान्यता है कि बसंत पंचमी पर इन दोनों की पूजा करने से वैवाहिक जीवन में आ रही परेशानियां दूर हो जाती है। परिणामस्वरूप वैवाहिक जीवन हमेशा खुशहाल रहता है।

बसंत पंचमी 2023 पूजा विधि

बसंत पंचमी के दिन पीले वस्त्र धारण करके माथे पर एक पीला तिलक लगाकर देवी सरस्वती की पूजा करें। ओम् ऐं सरस्वत्यै नमः इस मंत्र का जाप करना उत्तम होता है। ऐसे में पूजा के दौरान ऐसा करें। इसके बाद मां सरस्वती की पूजा में पीले वस्त्र, पीले फूल, पीली मिठाई, हल्दी और पीले रंग का इस्तेमाल करना चाहिए। माता सरस्वती की पूजा के बाद हवन और उनकी आरती करें। पूजन के अंत में प्रसाद वितरित करें. इस दिन मां सरस्वती को पीले रंग की मिठाईयों, फलों का भोग लगाया जाता है।


Saturday, January 14, 2023

मकर संक्रांति 2023

 प्राचीन श्री गौरी शिव शंकर मनोकामना सिद्ध मन्दिर (श्री शिव मन्दिर) 


आपसभी भगतगणो को मकर संक्रांति पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं महंत/पुजारी:- श्री पप्पू बाबा(उर्फ श्री राज कुमार पाण्डेय) कॉलेक्ट्रीट घाट पटना बिहार इंडिया.  

Makar Sankranti पर अपनी राशि अनुसार दान करें ये चीजें, किस्मत खुल जाएगी 


Makar Sankranti 2023: मकर संक्रांति पर, पूरे भारत में भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी सहित सूर्य देव की पूजा की जाती है।



सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने की घटना को ही मकर संक्रान्ति कहा जाता है। यह पर्व पौष मास के शुक्ल पक्ष में मनाया जाता है। मकर संक्रांति पर, पूरे भारत में भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी सहित सूर्य देव की पूजा की जाती है। इस दिन पूरे भारत में अनेकों रूपों में यह पर्व मनाया जाता है। इस पर्व को केरल में मकर संक्रांति, असम में माघ बिहू, हिमाचल प्रदेश में माघी साजी, जम्मू में माघी संगरंद या उत्तरायण (उत्तरायण), हरियाणा में सकरत, राजस्थान में सकरत, मध्य भारत में सुकरत, पोंगल तमिलनाडु में, गुजरात में उत्तरायण, और उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड में घुघुती, बिहार में दही चुरा, ओडिशा में मकर संक्रांति, कर्नाटक, महाराष्ट्र, गोवा, पश्चिम बंगाल (जिसे पौष संक्रांति या मोकोर सोनक्रांति भी कहा जाता है), उत्तर प्रदेश (जिसे खिचड़ी भी कहा जाता है) संक्रांति), उत्तराखंड (जिसे उत्तरायणी भी कहा जाता है) या आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में संक्रांति और शिशुर सेनक्रथ (कश्मीर) कहा जाता है।  

इस बार मकर संक्रान्ति पर बनें ये शुभ मुहूर्त (Makar Sankranti 2023 Muhurat) 

 इस वर्ष मकर संक्रांति 14 और 15 जनवरी को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार सूर्य 14 जनवरी 2023 को रात 8 बजकर 21 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेगा। भारतीय शास्त्रों में सूर्योदय को ही किसी तिथि या पर्व का आधार माना जाता है। ऐसे में मकर संक्रांति 15 जनवरी को उदया तिथि होने के कारण मनाई जाएगी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किया गया दान-पुण्य अनंत गुणा होकर मिलता है। यही कारण है कि इस दिन पूरे देश भर में श्रद्धालु भक्तजन इस दिन जमकर दान-पुण्य करते हैं। आप भी जानिए कि आपकी राशि के अनुसार आपको क्या दान करना चाहिए।

यह भी पढ़ेंः MAKAR SANKRANTI 2023: इस बार 15 जनवरी को मनाई जाएगी संक्रान्ति, ये हैं मुहूर्त

अपनी राशि अनुसार ये चीजें दान करें मकर संक्रान्ति पर

मेष: गुड़ की मिठाई, मूंगफली, तिल के साथ गुड़
वृषभ: चावल, दही, सफेद वस्त्र, तिल मीठा
मिथुन: चावल, सफेद और हरा कम्बल, मूंग की दाल
कर्क: चांदी, सफेद तिल या कपूर
कन्या: हरे रंग का कंबल, खिचड़ी (चावल और दाल)
तुला: चीनी, सफेद कपड़ा या खीर या कपूर
वृश्चिक: लाल वस्त्र या तिल
धनु: पीला कपड़ा या सुनहरा लेख
मकर: काला कम्बल, काला तिल या चाय
कुम्भ: खिचड़ी, तिल या राजमा
मीन: रेशमी वस्त्र, चना, मसूर या तिल






Thursday, January 5, 2023

पौष माह की पूर्णिमा 06 जनवरी 2023

 प्राचीन श्री गौरी शिव शंकर मनोकामना सिद्ध मन्दिर (श्री शिव मन्दिर) 

आपसभी भगतगणो को पौष पूर्णिमा पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं महंत/पुजारी:- श्री पप्पू बाबा(उर्फ श्री राज कुमार पाण्डेय) कॉलेक्ट्रीट घाट पटना बिहार इंडिया

हिंदू पंचाग के तिथि में चंद्रमा के अनुसार ही बदलती है। इस दिन धार्मिक मान्यता के अनुसार दान और स्नान का बहुत ही महत्व होता है। यहां जानिए तिथि और समय:--



इस बार पौष माह की पूर्णिमा 06 जनवरी 2023 को मनाई जाएगी। इस दिन चंद्रमा का आकार पूरा होता है। पौष के माह को सूर्य का माह भी कहा जाता है। पौष पूर्णिमा के दिन स्नान और दान को महत्वपूर्ण माना गया है। इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों के पूजन से मनोकामनाएं पूर्ण होती है और जीवन की हर बाधा दूर होती है।

हिंदू धर्म में पूर्णिमा को बेहद खास माना जाता है। इस बार की पौष मास की पूर्णिमा 06 जनवरी 2023 को मनाई जाएगी। यह साल 2023 की पहली पूर्णिमा है। पूर्णिमा के दिन चंद्रमा पूर्ण आकार में होता है। पौष को भगवान सूर्य का महीना कहा जाता है इसलिए इस महीने में आने वाली पूर्णिमा को पौष पूर्णिमा कहते हैं। हिन्दू धर्म में इस पूर्णिमा का काफी महत्व दिया जाता है और इस दिन लोग अलग-अलग रीति-रिवाज़ों से पूजा करते हैं। मान्यता के अनुसार, पौष पूर्णिमा पर विधिवत पूजन से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है। पौष पूर्णिमा के दिन दान, स्नान और सूर्य देव को अर्घ्य देने का विशेष महत्व बतलाया गया है। 

पौष पूर्णिमा का महत्व (Paush Purnima 2023 Importance) 

वैदिक ज्योतिष के अनुसार, पौष सूर्य देव का माह कहलाता है। इस मास में सूर्य देव की आराधना से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसलिए पौष पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान और सूर्य देव को अर्घ्य देने की परंपरा है। पौष का महीना सूर्य देव का माह है और पूर्णिमा चंद्रमा की तिथि है। अतः सूर्य और चंद्रमा का यह अद्भूत संगम पौष पूर्णिमा की तिथि को ही होता है। इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों के पूजन से मनोकामनाएं पूर्ण होती है और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती है।

पौष पूर्णिमा 2023 शुभ मुहूर्त (Paush Purnima 2023 Shubh Muhurat)

पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 06 जनवरी 2023 को रात 02 बजकर 16 मिनट पर होगी और इसका समापन 07 जनवरी 2023 को सुबह 04 बजकर 37 मिनट पर होगा। उदयातिथि के अनुसार, पौष पूर्णिमा इस बार 06 जनवरी को ही मनाई जाएगी. साथ ही इस बार पौष पूर्णिमा पर सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है। यह एक अत्यंत शुभ योग माना जाता है और इसमें किए गए सभी कार्य सफल होते हैं। सर्वार्थ सिद्धि योग 7 जनवरी, 2023 शनिवार को रात 12 बजकर 14 मिनट से शुरू होगा और इसका समापन सुबह 7 बजकर 15 मिनट पर होगा। 

पौष पूर्णिमा पूजन विधि (Paush Purnima 2023 Pujan Vidhi)

सुबह स्नान से पहले व्रत करने का संकल्प लिया जाता है। पवित्र नदी में नहाने के बाद भगवान को अर्घ्य दें। सबसे पहले सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद भगवान मधुसूदन की पूजा करनी चाहिए. इसके बाद ब्राह्मण या किसी जरूरतमंद को भोजन कराएं। इस दिन कंबल, गुड़, तिल जैसी चीजों का दान करना शुभ माना जाता है।

Sunday, November 6, 2022

देव दिवाली 7 नवम्बर 2022


प्राचीन श्री गौरी शिव शंकर मनोकामना सिद्ध मंदिर (श्री शिव मंदिर)

आप सभी भगतगणो को देव 🌏दिवाली की हार्दिक शुभकामनाएं   महंत/पुजारी:- श्री पप्पू बाबा (उर्फ श्री राज कुमार पाण्डेय) कॉलेक्ट्रीट घाट पटना बिहार इंडिया PLEASE CONTACT ME


देव दीवाली पर दीपदान का है खास महत्व, जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और विधि. हिंदू धर्म में कार्तिक मास की पूर्णिमा का खास महत्व है. इस दिन को देव दीवाली के तौर पर भी मनाया जाता है. इस साल देव दीपावली 07 नवंबर को मनाई जाएगी।

 देव दीपावली के दिन दीप दान का खास महत्व है।

Dev Diwali 2022: देव दीवाली पर दीपदान का है खास महत्व, जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और विधि


Dev Diwali 2022 Date: हिंदू धर्म में कार्तिक मास की पूर्णिमा का खास महत्व है. इस दिन को देव दीवाली के तौर पर भी मनाया जाता है. इस साल देव दीपावली 07 नवंबर को मनाई जाएगी।

 Dev Diwali 2022 Date: देव दीपावली के दिन दीप दान का खास महत्व है।

 Dev Diwali 2022 Date: कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को देव दीवाली का पर्व मनाया जाता है. यह दीपावली के 15 दिन बाद पड़ता है। इस साल देव दीवाली 7 नवंबर को मनाई जाएगी. बनारस में देव दीवाली का त्योहार खास उत्साह और समर्पण के साथ मनाया जाता है. इस दिन गंगा नदी में दीपदान करने की परंपरा है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार देव दीवाली, भगवान शिव के त्रिपुरासुर पर विजय प्राप्त करने की खुशी में मनाया जाता है। देव दीवाली को लेकर धार्मिक मान्यता यह भी है कि इस दिन देवता गण पृथ्वी पर आते हैं और काशी में दीवाली मनाते है। इसलिए इसे देव दीवाली कहा जाता है। इस दिन दीपदान का विशेष महत्व है. आइए जानते हैं देव दीपावली की तिथि, शुभ मुहूर्त और दीपदान का महत्व।



कब है देव दीवाली 2022 | Dev Diwali 2022 date

हिंदू पंचांग के अनुसार देव दीवाली कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है. इस साल कार्तिक पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 7 नवंबर 2022 को शाम 4 बजकर 15 मिनट से हो रही है. वहीं पूर्णिमा तिथि की समाप्ति 8 नवंबर को शाम 4 बजकर 31 मिनट पर हो रही है. ऐसे में देव दीपावली 07 नवंबर 2022 को मनाई जाएगी।



 देव दीपावली 2022 शुभ मुहूर्त | Dev Diwali 2022 Shubh Muhurat

प्रदोष काल में दीपदान का मुहूर्त - 05:14 शाम से 07:49 संध्या

पूर्णिमा तिथि आरंभ - नवम्बर 07, 2022 को 04:15 शाम बजे

 पूर्णिमा तिथि समाप्त - नवम्बर 08, 2022 को 04:31 शाम बजे

देव दीवाली पर कैसे करें दीपदान | how to Deep Daan on Dev Diwali

देव दीवाली पर यानी कार्तिक पूर्णिमा के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान ध्यान से निवृत हो जाएं. इसके बाद सबसे पहले उगते हुए सूर्य को जल अर्पित करें. फिर तुलसी माता को जल अर्पित करें. इसके बाद भगवान शिव और भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए. देव दीवाली पर शाम के समय प्रदोष काल में 11, 21, 51 या 108 आटे का दीया बनाकर उसमें तेल डालें. इसके बाद सभी देवी-देवताओं और ईष्ट देव का स्मरण करते हुए दीपक पर कुमकुम, हल्दी, अक्षत, और फूल अर्पित करें. इसके बाद दीपक को नदी में विसर्जित करना चाहिए।

दीपदान का क्या है महत्व | Deep Daan Importance



पौराणिक मान्यता है कि देव दीवाली यानी कार्तिक पूर्णिमा के दिन काशी के गंगा घाट पर स्नान करने के लिए पधारते हैं। मान्यता है कि जो कोई इस दिन प्रदोष काल में नदी में दीपदान करता है, उसे शत्रुओं का भय नहीं सताता है। इसके अलावा जीवन में सुख-समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है. कहा जाता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान शिव के निमित्त दीपक जलाने से जीवन में उन्नति होती है. इसके अलावा मान्यता यह भी है कि देव दीवाली पर दीपदान करने से यम, शनि, राहु-केतु के बुरे प्रभाव कम हो जाते हैं और मां लक्ष्मी की कृपा से आर्थिक जीवन खुशहाल रहता है।

Thursday, November 3, 2022

 Dev Uthani Ekadashi and Tulsi Vivah 2022 Date: 


देवउठनी एकादशी और तुलसी विवाह की तारीखों में कन्फ्यूजन, जानें सही डेट-टाइम

देवउठनी एकादशी के अगले दिन भगवान विष्णु के शालीग्राम स्वरूप और माता तुलसी का विवाह कराया जाता है. कहते हैं कि देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु चार महीने बाद योग निद्रा से जागते हैं. इस बार देवउठनी एकादशी और तुलसी विवाह की तारीखों को लेकर लोगों में बड़ा कन्फ्यूजन है. 


Dev Uthani Ekadashi and Tulsi Vivah 2022 Date: 

हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवउठनी एकादशी मनाई जाती है. इसके अगले दिन भगवान विष्णु के शालीग्राम स्वरूप और माता तुलसी का विवाह कराया जाता है. कहते हैं कि देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु चार महीने बाद योग निद्रा से जागते हैं. इस बार देवउठनी एकादशी और तुलसी विवाह की तारीखों को लेकर लोगों में बड़ा कन्फ्यूजन है. आइए जानते हैं कि इसकी तिथियां क्या हैं.



कब है देवउठनी एकादशी?

देवउठनी एकादशी कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है. इस बार कार्तिक शुक्ल एकादशी तिथि गुरुवार, 03 नवंबर को शाम 07 बजकर 30 मिनट से लेकर शुक्रवार, 04 नवंबर को शाम 06 बजकर 08 मिनट तक रहेगी. ऐसे में देवउठनी एकादशी 04 नवंबर को मनाई जाएगी.

देवउठनी एकादशी का पारण

जो लोग देवउठनी एकादशी के दिन व्रत रखने वाले हैं, वे 05 नवंबर दिन शनिवार को सुबह 06 बजकर 36 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 47 मिनट तक व्रत का पारण कर सकते हैं.

कब है तुलसी विवाह?


तुलसी विवाह कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाया जाता है. इस बार कार्तिक शुक्ल द्वादशी तिथि शनिवार, 05 नवंबर को शाम 06 बजकर 08 मिनट से आरंभ होगी और रविवार, 06 नवंबर को शाम 05 बजकर 06 मिनट पर इसका समापन होगा. ऐसे में तुलसी विवाह 05 नवंबर को किया जाएगा.

देवउठनी एकादशी की पूजन विधि



एकादशी के दिन सुबह स्नानादि के बाद व्रत संकल्प लें. इसके बाद भगवान विष्णु की पूजा करें और उनके सामने दीप-धूप जलाएं. उन्हें फल, फूल, मिठाई और भोग अर्पित करें. भगवान विष्णु को तुलसी बहुत प्रिय है. इसलिए इस दिन उन्हें तुलसी दल जरूर अर्पित करें.

शाम के समय भगवान विष्णु के मंत्रो का जाप करें. इस दिन सात्विक आहार का ही सेवन करें. चावल खाने से बचें और ब्रह्मचर्या का पालन करें.



तुलसी विवाह की पूजन विधि

तुलसी विवाह पर सूर्योदय के समय स्नानादि के बाद घर के मंदिर में दीपक प्रज्वलित करें. विष्णु जी का गंगाजल से अभिषेक करें. उन्हें तुलसी दल अर्पित करें. तुलसी विवाह के दिन विष्णु के शालीग्राम अवतार का तुलसी के साथ विवाह कराया जाता है. विवाह संपन्न होने के बाद भगवान विष्णु की आरती उतारें और उन्हें भोग लगाएं. इस दिन विष्णु जी को तुलसी का भी भोग लगाया जाता है.

Thursday, October 27, 2022

आप सभी को श्री छठ पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं

प्राचीन श्री गौरी शिव शंकर मनोकामना सिद्ध मन्दिर (श्री शिव मन्दिर)  



आपसभी भगतगणो को छठ पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं महंत/पुजारी:- श्री पप्पू बाबा(उर्फ श्री राज कुमार पाण्डेय) कॉलेक्ट्रीट घाट पटना बिहार इंडिया 

छठ पूजा: समय, तिथि और अनुष्ठान

नहाई खाई - 28 अक्टूबर (सुबह 06:42 बजे सूर्योदय; शाम 06:04 बजे सूर्यास्त)

चार दिनों तक चलने वाले इस उत्सव की शुरुआत 'नहाई खाई' की रस्म से होती है।  भक्त अपने घरों को साफ करते हैं और एक जल निकाय में पवित्र डुबकी लगाते हैं, अधिमानतः गंगा नदी में।  छठ व्रत करने वाली महिलाएं इस दिन सिर्फ एक बार भोजन करती हैं।  

खरना - 29 अक्टूबर (सुबह 06:43 बजे सूर्योदय, शाम 06:04 बजे सूर्यास्त)

दूसरे दिन को खरना कहा जाता है जब पूरा परिवार सूर्य देव की पूजा करता है।  महिलाएं भी इस दिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक बिना पानी की एक बूंद पिए उपवास करती हैं।

छठ पूजा - 30 अक्टूबर (सुबह 06:43 बजे सूर्योदय; 

शाम 06:03 बजे सूर्यास्त) तीसरे दिन लोग छठ पूजा करते हैं।  छठ पूजा के अवसर पर महिलाएं पूरे दिन बिना पानी पिए व्रत रखती हैं।

उषा अर्घ्य - 31 अक्टूबर (सुबह 06:44 बजे सूर्योदय; शाम 06:02 बजे सूर्यास्त)

 छठ पूजा चौथे दिन समाप्त होती है जिसे उषा अर्घ्य के नाम से जाना जाता है।  इस दिन, विश्वासी सूर्योदय से पहले पानी में खड़े होते हैं और सूर्य भगवान को प्रसाद चढ़ाते हैं।  छठ पूजा बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है।

आयोजन के दौरान किन देवताओं की पूजा की जाती है?

 छठ पूजा के दौरान, भक्त सूर्य देव (भगवान सूर्य) और छठी मैया से उनकी समृद्धि और कल्याण के लिए प्रार्थना करते हैं।


Mantra for Study: पढ़ाई में नहीं लगता मन, तो करें इन सरल मंत्रों का जाप, विद्यार्थियों के लिए है बेहद चमत्कारी

    Mantra  for  Study: पढ़ाई में नहीं लगता मन, तो करें इन सरल मंत्रों का जाप, विद्यार्थियों के लिए है बेहद चमत्कारी सार Mantra For Study Co...