Friday, December 31, 2021

आप सभी भगतगणों को प्राचीन श्री गौरी शिव शंकर मनोकामना सिद्ध मंदिर

 आप सभी भगतगणों को प्राचीन श्री गौरी शिव शंकर मनोकामना सिद्ध मंदिर(श्री शिव मन्दिर ) की तरफ से नव वर्ष 2022  की हार्दिक शुभकामनाएँ महंत/पुजारी जी:- श्री पप्पू बाबा उर्फ़ श्री राज कुमार पाण्डेय कलेक्ट्रियट घाट पटना इण्डिया


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🌞~*आज का हिन्दू पंचांग*~🌞

🚩✊जय हिंदुस्तान✊🚩

⛅ *दिनांक - 01 जनवरी 2022*

⛅ *दिन - शनिवार*

⛅ *विक्रम संवत - 2078*

⛅ *शक संवत -1943*

⛅ *अयन - दक्षिणायन*

⛅ *ऋतु - शिशिर* 

⛅ *मास -  पौस  (भारत के अनुसार मार्गशीर्ष मास)*

⛅ *पक्ष -  कृष्ण* 

⛅ *तिथि - त्रयोदशी सुबह 07:17 तक तत्पश्चात चतुर्दशी*

⛅ *नक्षत्र - जेष्ठा शाम 07:18 तक तत्पश्चात मूल*

⛅ *योग -  गण्ड दोपहर 01:56 तक तत्पश्चात वृद्धि*

⛅  *राहुकाल - सुबह 09:59 से सुबह 11:21 तक*

⛅ *सूर्योदय - 07:17*

⛅ *सूर्यास्त - 18:07*

⛅ *दिशाशूल - पूर्व  दिशा में*

⛅ *व्रत पर्व विवरण -  मासिक शिवरात्रि*

🌞~*आज का हिन्दू पंचांग*~🌞

🚩✊जय हिंदुस्तान🚩

💥 *विशेष - त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*

🌞~*आज का हिन्दू पंचांग*~🌞

🚩✊जय हिंदुस्तान✊🚩

🌷 *नकारात्मक ऊर्जा मिटाने के लिए* 🌷

 ➡ *02 जनवरी 2022 रविवार को अमावस्या है ।*



🏡  *घर में हर अमावस अथवा हर १५ दिन में पानी में खड़ा नमक (१ लीटर पानी में ५० ग्राम खड़ा नमक) डालकर पोछा लगायें । इससे नेगेटिव एनेर्जी चली जाएगी । अथवा खड़ा नमक के स्थान पर गौझरण अर्क भी डाल सकते हैं ।*

🌞~*आज का हिन्दू पंचांग*~🌞

🚩✊जय हिंदुस्तान✊🚩

🌷 *अमावस्या* 🌷

🙏🏻 *अमावस्या के दिन जो वृक्ष, लता आदि को काटता है अथवा उनका एक पत्ता भी तोड़ता है, उसे ब्रह्महत्या का पाप लगता है  (विष्णु पुराण)*

🌞~*आज का हिन्दू पंचांग*~🌞

🚩✊जय हिंदुस्तान✊🚩

🌷 *धन-धान्य व सुख-संम्पदा के लिए* 🌷

🔥 *हर अमावस्या को घर में एक छोटा सा आहुति प्रयोग करें।*

🍛 *सामग्री : १. काले तिल, २. जौं, ३. चावल, ४. गाय का घी, ५. चंदन पाउडर, ६. गूगल, ७. गुड़, ८. देशी कर्पूर, गौ चंदन या कण्डा।*

🔥 *विधि: गौ चंदन या कण्डे को किसी बर्तन में डालकर हवनकुंड बना लें, फिर उपरोक्त ८ वस्तुओं के मिश्रण से तैयार सामग्री से, घर के सभी सदस्य एकत्रित होकर नीचे दिये गये देवताओं की १-१ आहुति दें।*

🌞~*आज का हिन्दू पंचांग*~🌞

🚩✊जय हिंदुस्तान✊🚩

🔥 *आहुति मंत्र* 🔥

🌷 *१. ॐ कुल देवताभ्यो नमः*

🌷 *२. ॐ ग्राम देवताभ्यो नमः*

🌷 *३. ॐ ग्रह देवताभ्यो नमः*

🌷 *४. ॐ लक्ष्मीपति देवताभ्यो नमः*

🌷 *५. ॐ विघ्नविनाशक देवताभ्यो नमः*

🌞~*आज का हिन्दू पंचांग*~🌞

  🚩✊जय हिंदुस्तान✊🚩

☀🏯!! हर हर महादेव !!🏯

🍃🎋🍃🎋🕉️🔔नमः शिवाय🔔🕉🎋🍃🎋🍃

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Wednesday, November 17, 2021

आप सभी भगतगणों को प्राचीन श्री गौरी शिव शंकर मनोकामना सिद्ध मंदिर(श्री शिव मन्दिर ) की तरफ से हर वर्ष कार्तिक अमावस्या तिथि पर दीपावली  की हार्दिक शुभकामनाएँ महंत/पुजारी जी:- श्री पप्पू बाबा उर्फ़ श्री राज कुमार पाण्डेय कलेक्ट्रियट घाट पटना इण्डिया



Dev Deepawali 2021: देव दिवाली की तिथि, समय, महत्व और इससे जुड़ी खास बातें यहां पढ़ें...
कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही देव दीपावली भी मनाई जाती है. मान्यता है कि इस दिन देवता गंगा घाट पर आकर स्नान करते हैं. देव दीपावली खासतौर पर वाराणसी में मनाई जाती है.

देव दीपावली नाम से ही पता चलता है कि यह देवताओं की दिवाली है. यह कार्तिक पूर्णिमा के लिए मनाया जाने वाला त्योहार है जो मुख्य रूप से वाराणसी में मनाया जाता है. यह रोशनी के त्योहार दीपावली के पंद्रह दिनों के बाद आता है.

देव दीपावली का महत्व

देव दीपावली को त्रिपुरोत्सव या त्रिपुरारी पूर्णिमा स्नान के रूप में भी जाना जाता है. यह त्योहार असुर त्रिपुरासुर पर भगवान शिव की जीत की खुशी में मनाया जाता है.

पृथ्वी पर गंगा स्नान करने आते हैं देवता

ऐसी मान्यता है कि देव दीपावली के दिन देवतागण वाराणसी में गंगा घाटों पर पवित्र गंगा नदी में स्नान करने के लिए पृथ्वी पर अवतरित होते हैं. इसलिए इस दिन गंगा नदी में मिट्टी के दीपक जलाए जाते हैं. दीप जलाने की इस परंपरा की शुरुआत 1985 में पंचगंगा घाट से हुई थी.

गंगा के तट पर जलाए जाते हैं लाखों दीपक

इस दिन के उल्लास में लोग प्रत्येक साल देव दीपावली के दिन पवित्र गंगा नदी के तट पर सभी घाटों की सीढ़ियों पर लाखों मिट्टी के दीपक जलाते हैं. इस दिन पवित्र गंगा आरती 21 ब्राह्मण पुजारियों और 24 महिलाओं द्वारा की जाती है. इस समय हजारों की संख्या में भक्त और पर्यटक यहां मौजूद होते हैं. इस दिन घाटों की रोशनी और तैरते हुए दीये आकर्षक होते हैं. इस दिन यहां को दृश्य मनमोहक होता है.

देव दीपावली 2021 रोचक फैक्ट्स

: 5 दिवसीय उत्सव देवोत्थान एकादशी से शुरू होता है और कार्तिक पूर्णिमा के दिन समाप्त होता है.

: कार्तिक पूर्णिमा के दिन लोग कार्तिक स्नान करते हैं, खासतौर पर भक्त पवित्र गंगा नदी में स्नान करने देश के कोने-कोने से पहुंचते हैं.

: इस दिन शाम को तेल से दीप जलाकर गंगा नदी में प्रवाहित किया जाता है.

: शाम को दशमेश्वर घाट पर भव्य गंगा आरती की होती है. इस वक्त हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होते हैं.

: गंगा आरती के दौरान भजन-कीर्तन, लयबद्ध ढोल-नगाड़ा, शंख बजाये जाते हैं.

देव दीपावली 2021: तिथि और समय

देव दीपावली गुरुवार 18 नवंबर 2021

प्रदोषकाल देव दीपावली मुहूर्त – 17:09 से 19:47

अवधि – 02 घंटे 38 मिनट

पूर्णिमा तिथि शुरू – 12:00 नवंबर 18, 2021

पूर्णिमा तिथि समाप्त – 14:26 नवंबर 19, 2021


Sunday, November 7, 2021

 आप सभी भगतगणों को प्राचीन श्री गौरी शिव शंकर मनोकामना सिद्ध मंदिर(श्री शिव मन्दिर ) की तरफ से छठ पूजा की हार्दिक शुभकामनाएँ  महंत/पुजारी जी:- श्री पप्पू बाबा उर्फ़ श्री राज कुमार पाण्डेय  कलेक्ट्रियट घाट पटना इण्डिया


छठ पूजा 2021: नहाय खाय के साथ आज से शुरू होगी छठ पूजा; जानिए पूजा सामग्री और व्रत की विधि के बारे में

छठ पूजा 2021: वैसे तो छठ पूजा मुख्य रूप से बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में मनाई जाती है, लेकिन अब यह एक वैश्विक पहचान बन चुकी है. लोक आस्था के इस पर्व में उगते और डूबते सूर्य की पूजा की जाती है। सूर्य षष्ठी का व्रत होने के कारण इसे छठ कहा जाता है। छठ पर्व साल में दो बार मनाया जाता है। पहली बार चैत्र में और दूसरी बार कार्तिक में। चैत्र शुक्ल पक्ष षष्ठी को मनाए जाने वाले छठ पर्व को चैती छठ और कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी को मनाए जाने वाले त्योहार को कार्तिकी छठ कहा जाता है। कार्तिक माह में मनाए जाने वाले छठ की अधिक मान्यता है और इस महीने में लोग इस त्योहार को व्यापक रूप से मनाते हैं।

चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व की शुरुआत कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष चतुर्थी तिथि को नहाय-खाय से होती है, जो इस बार सोमवार यानि 8 नवंबर को पड़ रही है। नदी, एक तालाब। और सात्विक भोजन एक बार ही करें । कार्तिक मास की पंचमी को खरना के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन व्रती गुड़, अरवा चावल की खीर और शाम को रोटी प्रसाद के रूप में खाते हैं. इसके बाद तीसरे दिन शाम को भगवान सूर्य को और चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। खास बात यह है कि खरना के दिन शाम को प्रसाद ग्रहण करने के बाद करीब 36 घंटे तक यानी उगते सूरज को अर्ध्य देने तक निर्जला व्रत रखा जाता है. इन चार दिनों में उपवास में प्याज, लहसुन या किसी भी प्रकार का मांसाहारी भोजन करना वर्जित है।

यह छठ पूजा 2021 अनुसूची

8 नवंबर 2021, सोमवार- (नहाय-खाय)

9 नवंबर 2021, मंगलवार- (खरना)

10 नवंबर 2021, बुधवार - (सूर्य अस्त को अर्घ्य)

11 नवंबर 2021, शुक्रवार- (उगते सूर्य को अर्घ्य)

पूजा विधि

कार्तिक शुक्ल षष्ठी के दिन घर में पवित्रता के साथ कई प्रकार के व्यंजन बनाए जाते हैं, जिनमें ठेकुआ विशेष रूप से प्रसिद्ध है। सूर्यास्त से पहले, सभी व्यंजनों को बांस की टोकरियों में भरकर पास के घाट पर ले जाया जाता है। ऐसी भी मान्यता है कि छठ पूजा में नई फसल का पहला चढ़ावा चढ़ाया जाता है। इसलिए गन्ने के फल को प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाता है। घाट को 4-5 गन्ने को खड़ा कर बनाया जाता है और उसके नीचे दीपक जलाए जाते हैं। व्रत का पालन करने वाले सभी पुरुष और महिलाएं जल में स्नान करते हैं और इन शाखाओं को अपने हाथों में लेकर देवी षष्ठी और भगवान सूर्य को अर्पित करते हैं। सूर्यास्त के बाद सभी अपने घरों को लौट जाते हैं। अगले दिन यानी कार्तिक शुक्ल सप्तमी को सूर्योदय से पहले ब्रह्म मुहूर्त में, फिर पत्तों में पकवान, सभी लोग नारियल और फल रखते हुए नदी के किनारे इकट्ठा होते हैं और उगते सूरज को अर्घ्य देते हैं। इसके बाद छठ व्रत की कथा सुनी जाती है और कथा के बाद प्रसाद लेकर व्रत तोड़ा जाता है.

छठ पूजा की सामग्री (छठ पूजा सामग्री सूची)

सूट या साड़ी, बांस की दो बड़ी टोकरियाँ, बाँस या पीतल का सूप, दूध और पानी के लिए एक गिलास, एक बर्तन और थाली, 5 गन्ने के पत्ते, शकरकंद और रसीला, सुपारी और सुपारी, हल्दी, मूली और अदरक का एक हरा पौधा छठ पूजा सामग्री में मीठा नींबू, मीठा कस्टर्ड सेब, केला, नाशपाती, पानी के साथ नारियल, मिठाई, गुड़, गेहूं, चावल का आटा, ठेकुआ, चावल, सिंदूर, दीपक, शहद और अगरबत्ती होनी चाहिए।

Wednesday, October 13, 2021

 आप सभी भगतगणों को प्राचीन श्री गौरी शिव शंकर मनोकामना सिद्ध मंदिर(श्री शिव मन्दिर ) की तरफ से दुर्गा पूजा और महानवमी

की हार्दिक शुभकामनाएँ 

महंत/पुजारी जी:- श्री पप्पू बाबा उर्फ़ श्री राज कुमार पाण्डेय 

कलेक्ट्रियट घाट पटना इण्डिया


 

Navratri Navami 2021 Puja Vidhi, Muhurat, Timings, Mantra: महानवमी 14 अक्टूबर को, जानिए शुभ मुहूर्त, हवन पूजन विधि, कथा, आरती सबकुछ यहां

Navratri Navami 2021 (Maha Navami) Puja Vidhi, Muhurat, Timings, Mantra, Procedure in Hindi: इस दिन मां दुर्गा की षोडशोपचार पूजा करने के बाद हवन किया जाता है। कई लोग नवमी के दिन कन्या पूजन (Kanya Pujan) भी करते हैं। नवरात्रि की महानवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है।

 

Navratri Navami 2021 (Maha Navami) Puja Vidhi, Muhurat, Timings, Mantra, Procedure: इस बार शारदीय नवरात्रि की नवमी 14 अक्टूबर को पड़ी है। ये नवरात्रि पूजा का आखिरी दिन होता है। इस दिन मां दुर्गा की षोडशोपचार पूजा करने के बाद हवन किया जाता है। कई लोग नवमी के दिन कन्या पूजन भी करते हैं। नवरात्रि की महानवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है। जानिए महानवमी पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि, कन्या पूजन का तरीका सभी जरूरी जानकारी यहां।

नवरात्रि नवमी पूजा मुहूर्त (Mahanavami Puja Muhurat 2021): नवमी तिथि की शुरुआत 13 अक्टूबर को रात 8 बजकर 7 मिनट पर हो जाएगी और इसकी समाप्ति 14 अक्टूबर को शाम 6 बजकर 52 मिनट पर होगी। पंचांग अनुसार ब्रह्म मुहूर्त 04:42 AM से 05:31 AM तक रहेगा। अभिजित मुहूर्त 11:44 AM से 12:30 PM तक रहेगा और 14 अक्टूबर को सुबह 9:36 बजे से लेकर पूरे दिन रवि योग भी रहेगा।

पूजा के मुहूर्त:
दिन का चौघड़िया
शुभ: प्रात: 06:27 से 07:53 तक।
लाभ: दोपहर 12:12 से 13:39 तक।
अमृत: दोपहर 13:39 से 15:05 तक।
शुभ (वार वेला): शाम 16:32 से 17:58 तक।
अमृत काल: दिन में 11:00 से 12:35 तक
रात का चौघड़िया :
अमृत: शाम 5 बजकर 58 मिनट से 07:32 तक।
लाभ (काल रात्रि) अर्धरात्रि 00:13 से 01:46 तक।


शुभ: 03:20 से 04:54 तक।
अमृत: 04:54 से 06:27 तक।

 

महानवमी पर ऐसे करें मां सिद्धिदात्री की पूजानवमी के दिन सुबह जल्दी उठकर साफ वस्त्र धारण कर लें। इसके बाद मां सिद्धिदात्री की पूजा शुरू करें। मां को प्रसाद, नवरस युक्त भोजन, नौ प्रकार के फूल-फल आदि चढ़ाएं। फिर धूप-दीप दिखाकर उनकी आरती उतारें। मां के बीज मंत्रों का जाप करें। कहते हैं मां के इस स्वरूप की अराधना करने से सभी प्रकार की सिद्धियां प्राप्त होती हैं। (यह भी पढ़ेंमहानवमी के दिन इन 4 राशि वालों पर मां अंबे की रहेगी विशेष कृपा, आर्थिक स्थिति हो सकती है मजबूत)

नवरात्रि के नौवे दिन के मंत्र (Navratri Mantra):
- देवी सिद्धिदात्र्यै नमः॥
-
सिद्ध गन्धर्व यक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥
-
या देवी सर्वभूतेषु सिद्धिरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमो नम:

नवमी कन्या पूजन विधि (Kanya Pujan Vidhi): कन्या पूजन 2 साल से लेकर 10 साल तक की कन्याओं का किया जाता है। ये कन्याएं मां दुर्गा के नौ रूपों का प्रतीक होती हैं। शुभ मुहूर्त में नवमी पूजा करके कन्या पूजन किया जाना चाहिए। कन्या पूजन में सबसे पहले कन्याओं के पैर धोएं। संभव हो तो उन्हें लाल रंग के वस्त्र भेंट करें। फिर उनके माथे पर कुमकुम लगाएं। हाथ में कलावा बांधें। फिर सभी कन्याओं और एक बालक को भोजन कराएं। ध्यान रखें कि भोजन में हल्वा, पूड़ी और चना जरूर शामिल करें। क्योंकि ये भोजन माता का प्रिय माना जाता है। फिर श्रद्धानुसार भोजन कराकर सभी कन्याओं का पैर छूकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें। अगर नौ कन्याओं का पूजन संभव हो तो आप दो कन्याओं का पूजन भी कर सकते हैं।

महानवमी पर कैसे करें हवन (Navratri Navami Havan Vidhi)?
हवन के लिए जरूरी सामग्रीआम की लकड़ी, गूलर की छाल और पत्ती, पीपल की छाल और तना, बेर, आम की पत्ती और तना, चंदन की लकड़ी, बेल, नीम, पलाश का पौधा, कलीगंज, देवदार की जड़, तिल, जामुन की कोमल पत्ती, अश्वगंधा की जड़, कपूर, लौंग, बहेड़ा का फल और हर्रे तथा घी, शकर, जौ, चावल, ब्राम्ही, मुलैठी की जड़, तिल, गुगल, लोभान, इलायची एवं अन्य वनस्पतियों का बूरा उपयोगी होता है। हवन के लिए गाय के गोबर से बने छोटे-छोटे उपले घी में डुबोकर डाले जाते हैं।

हवन विधि: माता अंबे की पूजा के बाद हवन की तैयारी करें। हवन सामग्री एकत्रित कर लें। फिर कपूर से आम की सूखी लकड़ियां जला लें। फिर हवन सामग्री की अग्नि में आहुति दें। इस दौरान इन मंत्रों का जाप करते रहें। आग्नेय नम: स्वाहा, गणेशाय नम: स्वाहा, गौरियाय नम: स्वाहा, नवग्रहाय नम: स्वाहा, दुर्गाय नम: स्वाहा, महाकालिकाय नम: स्वाहा, हनुमते नम: स्वाहा, भैरवाय नम: स्वाहा, कुल देवताय नम: स्वाहा, स्थान देवताय नम: स्वाहा, ब्रह्माय नम: स्वाहा, विष्णुवे नम: स्वाहा, शिवाय नम: स्वाहा, जयंती मंगलाकाली भद्रकाली कपालिनी दुर्गा क्षमा शिवाधात्री स्वाहा, स्वधा नमस्तुति स्वाहा, ब्रह्मामुरारी त्रिपुरांतकारी भानु: क्षादी: भूमि सुतो बुधश्च: गुरुश्च शक्रे शनि राहु 

केतो सर्वे ग्रहा शांति कर: स्वाहा, गुरुर्ब्रह्मा, गुरुर्विष्णु, गुरुर्देवा महेश्वर: गुरु साक्षात परब्रह्मा तस्मै श्री गुरुवे नम: स्वाहा, त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिंम् पुष्टिवर्धनम्/ उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् मृत्युन्जाय नम: स्वाहा, शरणागत दीनार्त परित्राण परायणे, सर्व स्थार्ति हरे देवि नारायणी नमस्तुते।

आखिर में एक गोला यानी सूखा नारियल लें। उसमें कलावा बाधें। अब पान, सुपारी, लौंग, बताशा, जायफल, पूरी, खीर, अन्य प्रसाद, घी नारियल में छेद कर उसके शीर्ष पर स्थापित करें। इसके बाद इसे हवन कुंड के बीच में रख दें। अब बची हुई हवन सामग्री इस मंत्र के साथ एक बार में आहुति दें- ‘ओम पूर्णमद: पूर्णमिदम् पुर्णात पूण्य मुदच्यते, पुणस्य पूर्णमादाय पूर्णमेल विसिस्यते स्वाहा’. अंत में मां दुर्गा के समक्ष अपने सामर्थ्य अनुसार कुछ रुपये रखें। फिर माता की आरती उतारें और हवन पूर्ण करें।


Mantra for Study: पढ़ाई में नहीं लगता मन, तो करें इन सरल मंत्रों का जाप, विद्यार्थियों के लिए है बेहद चमत्कारी

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