Saturday, June 3, 2023

#येष्‍ठपूर्णिमा2023

 


आपसभी भागतगानो  येष्‍ठ पूर्णिमा  की  हार्दिक शुभकामनाएं महंत/पुजारी:- श्री पप्पू बाबा(उर्फ श्री राज कुमार पाण्डेय) कॉलेक्ट्रीट घाट पटना बिहार इंडिया 



येष्‍ठ पूर्णिमा कब है, जानें तिथि, महत्‍व और शुभ मुहूर्त 



 Jyestha Purnima Kab ai: ज्‍येष्‍ठ मास की पूर्णिमा का धार्मिक दृष्टि से खास महत्‍व बताया गया है। ज्‍येष्‍ठ पूर्णिमा 4 जून को है और इस दिन धार्मिक कार्य पूजा अनुष्‍ठान, व्रत करने और दान पुण्‍य करने का विशेष महत्‍व होता है। कुछ स्‍थानों पर वट सावित्री व्रत भी ज्‍येष्‍ठ पूर्णिमा को रखा जाता है। महिलाएं पति की दीर्घायु के लिए व्रत करती हैं और बरगद के पेड़ की पूजा करके प्रार्थना करती हैं। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने और दान करने से मनुष्‍यों को शुभ फलों की प्राप्ति होती है। आइए आपको बताते हैं ज्‍येष्‍ठ पूर्णिमा की तिथि, महत्‍व और शुभ मुहूर्त। ज्‍येष्‍ठ पूर्णिमा की तिथि और शुभ मूहूर्त

ज्‍येष्‍ठ पूर्णिमा इस साल दो दिन की पड़ रही है। यानी कि ज्‍येष्‍ठ पूर्णिमा का व्रत 3 जून को रखा जाएगा और स्‍नान और दान 4 जून को किया जाएगा। पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 3 जून को सुबह 11 बजकर 16 मिनट पर आरंभ होगी और उसका समापन 4 जून को होगा। चूंकि पूर्णिमा तिथि चंद्र द्रेव को सम‍र्पित होती है इसलिए इसकी पूजा भी चंद्रोदय की गणना के अनुसार होती है।

ज्‍येष्‍ठ पूर्णिमा का महत्‍व



ज्‍येष्‍ठ पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्‍नान के साथ ही इस दिन भगवान सत्यनारायण की कथा सुनने का भी विशेष महत्‍व होता है। मान्‍यता है कि इस दिन चंद्र देव के साथ ही मां लक्ष्‍मी की आराधना भी की जाती है। रात्रि में चंद्रमा को दूध से अर्घ्‍य देने से आपके घर में धन धान्‍य की वृद्धि होती है और हर प्रकार के रोगों से राहत मिलती है। ज्‍येष्‍ठ पूर्णिमा की पूजाविधि

ज्‍येष्‍ठ पूर्णिमा पर भगवान विष्‍णु की पूजा करना भी शुभ माना जाता है। वहीं शाम के पहर में मां लक्ष्‍मी और रात को चंद्र देव की पूजा की जाती है। भगवान विष्‍णु की पीले फूल, फल और पीले चावल के साथ विधि विधान से पूजा करें। उसके बाद शाम को मां लक्ष्‍मी की पूजा करके केसर की खीर का भोग लगाएं। रात को इस चंद्र देव को दूध से अर्घ्‍य देना चाहिए और दीपक जलाना चाहिए। इस दिन महिलाएं बरगर के पेड़ की पूजा भी करती हैं और उसके चारों ओर परिक्रमा करके कलावा बांधती हैं। इस दिन ब्राह्माणों को भोजन और वस्‍त्र का दान करना चाहिए।

Monday, May 29, 2023

#GangaDussehra

      Ganga Dussehra 2023: 

 

आपसभी भागतगानो को गंगा दसहरा महापर्व की  हार्दिक शुभकामनाएं महंत/पुजारी:- श्री पप्पू बाबा(उर्फ श्री राज कुमार पाण्डेय) कॉलेक्ट्रीट घाट पटना बिहार इंडिया 

गंगा दशहरा पर राशिनुसार करें इन चीजों का दान, मिलेगा लाभ



Ganga Dussehra 2023: 

गंगा दशहरा पर मां गंगा की पूजा करने से उनकी असीम कृपा प्राप्त होती है। इस पावन मौके पर पतित पावनी गंगा में आस्था की डुबकी लगाने से साधक को 10 हजार पापों सो मुक्ति मिलती है। कहते हैं कि इस दिन राशिनुसार चीजें दान करने से भी बड़ा लाभ मिलता हैं।

Ganga Dussehra 2023: गंगा दशहरा का पर्व 30 मई 2023 को है और सनातन धर्म में गंगा दशहरा का त्योहार काफी महत्व रखता है। पौराणिक कथा के अनुसार, गंगा दशहरा मां गंगा के स्वर्ग से धरती पर आने का दिन है। गंगा दशहरा पर मां गंगा की पूजा करने से उनकी असीम कृपा प्राप्त होती है। इस पावन मौके पर पतित पावनी गंगा में आस्था की डुबकी लगाने से साधक को 10 हजार पापों सो मुक्ति मिलती है. कहते हैं कि इस दिन राशिनुसार चीजें दान करने से भी बड़ा लाभ मिलता है।

गंगा दशहरा पर राशिनुसार करें इन चीजों का दान

मेष- मेष राशि के लोग दिन तिल और कपड़े का दान करें।


वृषभ- वृषभ राशि वाले गरीबों को खाना और धन का दान करें।
मिथुन- मिथुन राशि वालों के लिए पानी का दान करना शुभ रहेगा।

कर्क- कर्क राशि के जातक पीले फलों का दान कर सकते है।

सिंह- सिंह राशि वाले तांबे के बर्तन या अनाज और किसी भी फल का दान कर सकते हैं।
कन्या- कन्या राशि के लोग बेलपत्र का दान करें तो लाभ मिलेगा।

तुला- तुला राशि वाले सतनाजा का दान कर सकते हैं।
वृश्चिक- वृश्चिक राशि वालों को मौसमी फलों का दान करना चाहिए।
धनु- धनु राशि के लोग काले तिल का दान कर सकते हैं


मकर- मकर राशि वाले मिट्टी के घड़े दान करने से लाभ पाएंगे।
कुंभ- कुंभ राशि वाले खाने की कोई भी सामग्री दान कर सकते हैं.
मीन- मीन राशि वाले पानी का दान करें तो उत्तम होगा। गंगा दशहरा 2023 मुहूर्त

ज्येष्ठ माह की दशमी तिथि 29 मई 2023 दिन सोमवार को सुबह 11 बजकर 49 मिनट से प्रारंभ होगी और इसका समापन 30 मई दिन मंगलवार को दोपहर 01 बजकर 07 मिनट पर होगा. उदया तिथि के चलते गंगा दशहरा का पर्व 30 मई को मनाया जाएगा।

Thursday, April 13, 2023

#SatuaniSankranti

Happy Satuani Sankranti 2023

 


प्राचीन श्री गौरी शिव शंकर मनोकामना सिद्ध मन्दिर (श्री शिव मन्दिर)


आपसभी भगतगणो को 
सत्तुआनी  महापर्व की  हार्दिक शुभकामनाएं महंत/पुजारी:- श्री पप्पू बाबा(उर्फ श्री राज कुमार पाण्डेय) कॉलेक्ट्रीट घाट पटना बिहार इंडिया 

Satuani Date 2023: कब है सतुआन? जानिए इस दिन क्यों खाते हैं सत्तू?


सतुआन 2023


satuan 2023 date: हर साल बैसाख माह के कृष्ण पक्ष की नवमी के सतुआन का त्यौहार मनाया जाता है। इस पर्व को लोग सत्तू खाकर मनाते हैं। आइए जानते हैं। इस साल कब है सतुआन और क्या है इसका महत्व?

Satuani Sankranti Date 2023 :- सूर्य के मीन से मेष राशि में आने के दिन को मेष संक्रांति (mesh sankranti) के नाम से जाना जाता है। वहीं इसे उत्तर भारत के लोग सत्तू संक्रांति या सतुआ संक्रांति के नाम से जानते हैं। इस दिन भगवान सूर्य उत्तरायण की आधी परिक्रमा पूरी कर लेते हैं। इसके साथ ही खरमास (kharmas) का समापन हो जाता है और सभी प्रकार के मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं। मेष संक्रांति को अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग तरीके से मनाते हैं। इसे उत्तर भारत समेत पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों में सतुआन (satuan) के रूप में मनाते हैं और इस दिन अपने इष्ट देव को सत्तू अर्पित करते हैं और इसके बाद खुद इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। आइए जानते हैं इस साल कब है सतुआन और क्या है इसे मनाने का महत्व.

मेष संक्रांति के दिन उत्तर और पूर्वी भारत के कई राज्यों में सत्तुआन का त्यौहार मनाया जाता है. इस बार सूर्य का मीन से मेष राशि में गोचर 14 अप्रैल को हो रहा है। ऐसे में मेष संक्रांति 14 अप्रैल को पड़ रही है। इसलिए सत्तुआन का पर्व 14 अप्रैल को मनाया जाएगा। 

क्यों मनाने हैं सतुआन का पर्व?

सामान्यतः हर वर्ष सतुआन का पर्व 14 या 15 अप्रैल को ही पड़ता है। इस साल यह पर्व 14 अप्रैल को मनाया जाएगा। बता दें कि इस दिन सूर्य राशि परिवर्तित करते हैं। इसके साथ ही इस दिन से ग्रीष्म ऋतु का आगमन हो जाता है। सतुआन के दिन सत्तू खाने की परंपरा बहुत लंबे समय से चली आ रही है। इस दिन लोग देवी देवता को मिट्टी के घड़े में पानी, गेहूं, जौ, चना और मक्के का सत्तू साथ में आम का टिकोरा अर्पित करते हैं। इसके बाद इसे खुद प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।

सत्तुआनी का महापर्व आज, जानें इसका महत्व और पूजन विधि

सतुआनी के पर्व पर सत्तू, गुड़ और चीनी से पूजा की होती है। इस त्योहर पर दान में सोना और चांदी देने की भी बड़ा महत्व है।वैशाख शुरू होने के साथ ही सत्तुआनी का महापर्व मनाया जाता है। उत्तर भारत में कई जगहों पर इसे मनाने की परंपरा काफी पहले से चली आ रही है। इस दिन लोग अपने पूजा घर में मिट्टी या पीतल के घड़े में आम का पल्लव स्थापित करते हैं। इस दिन दाल से बने सत्तू खाने की परंपरा होती। सत्तुआनी का महापर्व 13 अप्रैल यानी आज मनाया जा रहा है।


सतुआनी के पर्व पर सत्तू, गुड़ और चीनी से पूजा की होती है।  इस त्योहर पर दान में सोना और चांदी देने की भी बड़ा महत्व है। पूजा के बाद लोग सत्तू, आम प्रसाद के रूप में ग्रहण करते है।

सतूआन के दिन आम के टिकोरे और इमली की चटनी बनाई जाती है। इसेक बाद चने, जौ, गेहूं, मक्का के मिक्स सत्तू को पानी में आटा की तरह गूथ कर सेवन करते हैं। इसके साथ लोग अचार, चोखा और चटनी मिलाकर खाते हैं। इसके अलावा कई लोग सिर्फ चने के सत्तू में नींबू, मिर्च टमाटर, चटनी, नमक इत्यादि मिलाकर सेवन करते हैं।  सत्तू बिहारियों का प्रिय फास्ट फूड होता है।

इसके एक दिन बाद 15 अप्रैल को जूड़ शीतल का त्योहार मनाया जाएगा। 14 अप्रैल को सूर्य मीन राशि छोड़कर मेष राशि में प्रवेश करेंगे। इसी के उपलक्ष्य में यह त्योहार मनाया जाता है। इस दिन पेड़ में बासी जल डालने की भी परंपरा है। जुड़ शीतल का त्योहार बिहार में हर्षोलास के साथ मनाया जाता है।






Wednesday, April 5, 2023

#HanumanJayanti

 Hanuman Jayanti 2023:


प्राचीन श्री गौरी शिव शंकर मनोकामना सिद्ध मन्दिर (श्री शिव मन्दिर) 


आपसभी भगतगणो को श्रो हनुमान जयंती पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं महंत/
पुजारी:- श्री पप्पू बाबा(उर्फ श्री राज कुमार पाण्डेय) कॉलेक्ट्रीट घाट पटना बिहार इंडिया 


हनुमान जयंती आज, शुभ मुहूर्त में ऐसे करें बजरंगबली की पूजा, जानें विधि और उपाय

राम भक्त हनुमान की महिमा का कोई सानी नहीं है। उनकी शक्ति का कोई पैमाना नहीं है। दुख और मुसीबत की घड़ी में महाबली हनुमान का ध्यान हर समस्या का समाधान कर सकता है। हनुमान जयंती पर हनुमान जी की पूजा-उपासना करने का विधान है।

Hanuman Jayanti 2023: आज हनुमान जयंती है। हनुमान जी का जन्म चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को हुआ था। इस दिन बजरंगबली की विशेष पूजा उपासना से न केवल समस्याओं का अंत होता है, बल्कि मनचाहे फल की प्राप्ति भी होती है। इस दिन कुछ चमत्कारी उपाय भी बेहद मंगलकारी माने जाते हैं। आइए जानते हैं कि हनुमान जयंती का शुभ मुहूर्त और पूजन विधि जानते हैं।

हनुमान जयंती का महत्व
राम भक्त हनुमान की महिमा अपरंपार है। उनकी शक्ति का कोई पैमाना नहीं है। दुख और मुसीबत की घड़ी में महाबली हनुमान का ध्यान हर समस्या का समाधान कर सकता है। हनुमान जयंती पर हनुमान जी की पूजा-उपासना करने का विधान है। इनकी पूजा से जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर किया जा सकता है। इस दिन विशेष प्रयोग करके ग्रहों को भी शांत कर सकते हैं। शिक्षा, विवाह के मामले में सफलता और कर्ज-मुकदमे से मुक्ति के लिए भी ये दिन विशेष है।

हनुमान जयंती का शुभ मुहूर्त
शुभ का मुहूर्त- सुबह 06.06 से 07.40 मिनट तक
चर का मुहूर्त- सुबह 10.49 से दोपहर 12.24 तक
अभिजित मुहूर्त- सुबह 11.59 से दोपहर 12.49 तक
लाभ का मुहूर्त- दोपहर 12.24 से दोपहर 01.58 तक
सायंकालमुहूर्त- शाम 05.07 से शाम 06.41 तक
रात्रि मुहूर्त- शाम 06.42 से रात 08.07 तक

Wednesday, March 29, 2023

#श्रीरामनवमी2023

 प्राचीन श्री गौरी शिव शंकर मनोकामना सिद्ध मन्दिर (श्री शिव मन्दिर) 


आपसभी भगतगणो को श्रो रामनवमी पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं महंत/
पुजारी:- श्री पप्पू बाबा(उर्फ श्री राज कुमार पाण्डेय) कॉलेक्ट्रीट घाट पटना बिहार इंडिया 

Ram Navami 2023: कैसे भगवान राम के नाम पर पड़ी रामनवमी? जानें इस बार क्यों है खास

Ram Navami 2023: इस बार चैत्र नवरात्रि की राम नवमी 30 मार्च दिन बृहस्पतिवार को मनाई जाएगी। क्या आपको मालूम है कि आखिरी नवरात्र का नाम भगवान श्री राम के नाम पर ही क्यों पड़ा है। आइए आज आपको इसके पीछे का रहस्य बताते हैं।


Chaitra navratri 2023: नवरात्रि का समापन राम नवमी के साथ होता है। इस बार चैत्र नवरात्रि की रामनवमी 30 मार्च दिन बृहस्पतिवार को मनाई जाएगी। क्या आपको मालूम है कि आखिरी नवरात्र का नाम भगवान श्रीराम के नाम पर ही क्यों पड़ा है। आइए आज आपको इसके बारे में विस्तार से जानकारी देंगे। साथ ही, जानेंगे कि इस बार रामनवमी का महापर्व खास क्यों रहने वाला है।

ऐसा कहते हैं कि भगवान राम का धरती पर जन्म इसी दिन हुआ था। भक्तों के दुख दूर करने और दुष्टों का अंत करने के लिए श्रीराम त्रेता युग में इसी दिन पैदा हुए थे। वासंतिक नवरात्र के नौवें दिन उनका जन्म हुआ था। श्रीराम मध्य दोपहर में कर्क लग्न और पुनर्वसु नक्षत्र में पैदा हुए थे। भगवान राम के जन्म की इस तारीख का जिक्र रामायण और रामचरित मानस जैसे तमाम धर्मग्रंथों में किया गया है। श्री राम स्वयं भगवान विष्णु का सातवां अवतार थे।

भगवान राम और रावण के बीच युद्ध की कहानी भी नवरात्रि से जोड़कर देखी जाती है। ऐसा कहते हैं कि जिस वक्त श्री राम सीता को रावण के चंगुल से छुड़ाने के लिए युद्ध लड़ रहे थे। उस समय रावण पर विजय पाने के लिए भगवान श्री राम ने देवी दुर्गा का अनुष्ठान किया था। यह पूजा अनुष्ठान पूरे 9 दिनों तक चला था। जिसके बाद मां दुर्गा ने भगवान श्री राम के सामने प्रकट होकर उन्हें जीत का आशीर्वाद दिया था। वहीं, दसवें दिन भगवान श्री राम ने रावण का वध कर विजय हासिल की थी।

इस बार क्यों खास है राम नवमी?

इस बार नवमी तिथि पर बृहस्पतिवार और पुनर्वसु नक्षत्र दोनों हैं। इसलिए रामनवमी पर श्रीराम के जन्म नक्षत्र का संयोग भी बन गया है। इस संयोग के कारण आपकी पूजा, उपासना विशेष लाभकारी होगी. इस दिन की गई प्रार्थना निश्चित रूप से स्वीकृत होगी। इस शुभ दिन पर आप नए वस्त्र और नए रत्न धारण कर सकते हैं। इस महासंयोग पर आप दान करें तो और भी ज्यादा शुभ होगा।

श्रीराम नवमी पूजा विधि

मध्य दोपहर में भगवान राम की पूजा अर्चना करनी चाहिए। श्री रामचरितमानस का पाठ करें या श्री राम के मंत्रों का जाप करें. जिन महिलाओं को संतान उत्पत्ति में बाधा आ रही हो। ऐसी महिलाएं भगवान राम के बाल रूप की आराधना जरूर करें। श्री राम जी की पूजा-अर्चना करने के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराएं. गौ, भूमि, वस्त्र आदि का दान करें।

Friday, March 24, 2023

#चैतीछठ

 आप सभी को श्री चैती छठ पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं


प्राचीन श्री गौरी शिव शंकर मनोकामना सिद्ध मन्दिर (श्री शिव मन्दिर) 


आपसभी भगतगणो को चैती छठ पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं महंत/पुजारी:- श्री पप्पू बाबा(उर्फ श्री राज कुमार पाण्डेय) कॉलेक्ट्रीट घाट पटना बिहार इंडिया 


25 मार्च को नहाय खाय के साथ चैती छठ पर्व की शुरुआत होगी। 26 मार्च को खरना पूजा होगी. 27 मार्च को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा और 28 मार्य को उदयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर पारण किया जाएगा. जानें सभी का शुभ मूर्हुत...

लोक आस्था का महापर्व चैती छठ की शुरुआत नहाय खाये के साथ 25 मार्च से शुरू हो रहा है। साल भर में 2 बार छठ मनाया जाता है। मार्च या अप्रैल के महीने में चैती छठ और दूसरा कार्तिक मास अक्टूबर या नवंबर में मनाया जाता है। देश के कई हिस्सों में इस पर्व को बड़े धूम-धाम से मनाया जाता है।  खासकर बिहार, झारखण्ड, उत्तरप्रदेश में इस लोक आस्था के महापर्व को बड़े ही आस्था के साथ मनाते हैं।

25 मार्च को भरणी नक्षत्र में नहाय-खाय के साथ चैती छठ महापर्व शुरू होगा। उस दिन व्रती गंगा स्नान कर अरवा चावल, चना दाल, कद्दू की सब्जी, आंवले की चाशनी आदि ग्रहण कर चार दिवसीय इस महापर्व का संकल्प लेंगे। 26 मार्च रविवार को कृत्तिका नक्षत्र और प्रीति योग में व्रती पूरे दिन उपवास कर संध्या काल में खरना की पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करेंगे।

 इसी के साथ व्रतियों का 36 घंटे निर्जला उपवास शुरू हो जाएगा।


सूर्य अर्ध्य अर्पित करने का शुभ मुहूर्त:उन्होंने बताया कि 27 मार्च को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्ध्य दिया जाएगा और 28 मार्य को उदयमान सूर्य को अर्ध्य अर्पित कर पारण किया जाएगा। 27 मार्च को शाम के अर्ध्य के लिए 5.30 बजे व 28 मार्च को सुबह के अर्ध्य के लिए 5.55 बजे का मुहूर्त शुभ है।

चैती छठ सबसे प्राचीनतम छठ पर्व है। इस महीने में होने वाली नवरात्र पूजा भी सबसे प्राचीनतम है। चैती छठ की अपनी महत्वता है। इसे करने से शरीर के सारे कष्ट का निवारण होता है। साथ ही जितनी भी पारिवारिक उलझन है वो दूर होंगे।


Wednesday, March 22, 2023

चैती नवरात्रि

 

प्राचीन श्री गौरी शिव शंकर मनोकामना सिद्ध मन्दिर (श्री शिव मन्दिर)

आपसभी भगतगणो को चैती नवरात्रि
 पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं महंत/पुजारी:- श्री पप्पू बाबा(उर्फ श्री राज कुमार पाण्डेय) कॉलेक्ट्रीट घाट पटना बिहार इंडिया

चैत्र नवरात्रि 22 मार्च से शुरू, जानें दुर्गा पूजा और घट स्थापना का शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि


Chaitra navratri 2023: चैत्र मास में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से वासंतिक या चैत्र नवरात्रि आरंभ हो जाती है. इस बार चैत्र नवरात्रि 22 मार्च 2023 से 30 मार्च 2023 तक चलेंगे. दुर्गा पूजा और घट स्थापना (कलश स्थापना) का शुभ मुहूर्त, पूजन विधि, महत्व क्या है? इस बारे में आर्टिकल में जानेंगे.

नवरात्रि का हिंदू धर्म में काफी महत्व है. नवरात्रि में मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है. सालभर में कुल 4 नवरात्रि आती हैं जिसमें चैत्र और शारदीय नवरात्रि का महत्व काफी ज्यादा होता है. माना जाता है कि नवरात्रि में माता की पूजा-अर्चना करने से देवी दुर्गा की खास कृपा होती है. इस बार चैत्र नवरात्रि 22 मार्च 2023, बुधवार से शुरू हो रही हैं. मां दुर्गा की सवारी वैसे तो शेर है लेकिन जब वह धरती पर आती हैं तो उनकी सवारी बदल जाती है. इस बार मां दुर्गा नौका यानी नाव पर सवार होकर धरती पर आएंगी. तो आइए चैत्र नवरात्रि घट स्थापना, पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजन विधि भी जान लेते हैं.

नवरात्रि शुभ मुहूर्त (Chaitra Navratri Ghatasthapana Muhurat) 

प्रतिपदा तिथि 21 मार्च रात में 11 बजकर 4 मिनट पर लग जाएगी इसलिए 22 मार्च को सूर्योदय के साथ नवरात्रि की शुरुआत कलश स्थापना के साथ होगी. 

इस वर्ष मां का आगमन नौका पर है, जिसे सुख-समृद्धि कारक कहा जाता है. पूरे 9 दिनों के नवरात्र में मां के 9 स्वरूपों की पूजा होगी. उन्होंने नवरात्र के संयोग के बारे में बताया कि चार ग्रहों का परिवर्तन नवरात्र पर देखने को मिलेगा. यह संयोग 110 वर्षों के बाद मिल रहा है. इस बार नव संवत्सर लग रहा है. माना जाता है कि इसी दिन भगवान ब्रह्मा ने पृथ्वी की रचना की थी. इसलिए यह और भी महत्वपूर्ण हो जाता है. . चैत्र नवरात्रि घट स्थापना का शुभ मुहूर्त (Chaitra navratri ghatasthapana 2023 Muhurat)

चैत्र नवरात्रि 22 मार्च 2023 से शुरू होकर 30 मार्च तक चलेंगे. घटस्थापना नवरात्रि के दौरान महत्वपूर्ण अनुष्ठानों में से एक है. यह नौ दिनों के उत्सव की शुरुआत का प्रतीक है. शास्त्रों में नवरात्रि की शुरुआत में एक निश्चित अवधि के दौरान घटस्थापना करने के लिए अच्छी तरह से परिभाषित नियम और दिशानिर्देश हैं. घटस्थापना देवी शक्ति का आवाहन है और इसे गलत समय पर करने से देवी शक्ति का प्रकोप हो सकता है. नवरात्रि में घट या कलश स्थापना को मुहूर्त के मुताबिक करना चाहिए. चैत्र नवरात्रि में घट स्थापना प्रतिपदा तिथि को आती है और इसका मुहूर्त द्वि-स्वभाव मीणा लग्न के दौरान आता है. 

घटस्थापना करने के लिए सबसे शुभ या शुभ समय दिन का पहला एक तिहाई है जबकि प्रतिपदा प्रचलित है. यदि किन्हीं कारणों से यह समय उपलब्ध नहीं है तो अभिजित मुहूर्त में घटस्थापना की जा सकती है. घटस्थापना के दौरान नक्षत्र चित्रा और वैधृति योग से बचने की सलाह दी जाती है लेकिन यह निषिद्ध नहीं है. 

घट स्थापना मुहूर्त शुभ मुहूर्त- 06:23 AM से 07:32 AM तक 
अवधि - 01 घंटा 09 मिनिट 
प्रतिपदा तिथि प्रारंभ - 21 मार्च 2023 को रात्रि 10:52 बजे
प्रतिपदा तिथि समाप्त - 22 मार्च 2023 को रात्रि 08:20 बजे
मीणा लग्न प्रारम्भ - 22 मार्च 2023 को 06:23 पूर्वाह्न
मीणा लग्न समाप्त - 22 मार्च 2023 को 07:32 AM

2023 चैत्र नवरात्रि घट स्थापना की विधि (Chaitra navratri 2023 ghatasthapana vidhi)

कलश को भगवान विष्णु का रूप माना जाता है. देवी दुर्गा की पूजा से पहले कलश की पूजा की जाती है. पूजा स्थल पर कलश की स्थापना करने से पहले उस जगह को गंगाजल से साफ किया जाता है फिर सभी देवी-देवताओं को आमंत्रित किया जाता है.  

आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि पर सवेरे-सवेरे जल्दी स्नान करके पूजा और व्रत का संकल्प लें.   इसके बाद पूजा स्थल की सजावट करें और चौकी रखें जहां पर कलश में जल भरकर रखें. फिर कलश पर कलावा लपेटें.  इसके बाद कलश के मुख पर आम या अशोक के पत्ते लगाएं. इसके बाद नारियल को लाल चुनरी में लपटेकर कलश पर रख दें. इसके बाद धूप, दीप जलाकर मां दुर्गा का आवाहन करें और शास्त्रों के मुताबिक मां दुर्गा की पूजा-उपासना करें. 

कलश स्थापना के बाद, गणेश जी और मां दुर्गा की आरती करते है जिसके बाद नौ दिनों का व्रत शुरू हो जाता है.

मां दुर्गा के किस स्वरूप की किस दिन होगी पूजा? 

1- नवरात्रि पहला दिन 22 मार्च 2023 दिन बुधवार: मां शैलपुत्री पूजा (घटस्थापना) 
2- नवरात्रि दूसरा दिन 23 मार्च 2023 दिन गुरुवार: मां ब्रह्मचारिणी पूजा 
3- नवरात्रि तीसरा दिन 24 मार्च 2023 दिन शुक्रवार: मां चंद्रघंटा पूजा 
4- नवरात्रि चौथा दिन 25 मार्च 2023 दिन शनिवार: मां कुष्मांडा पूजा 
5- नवरात्रि पांचवां दिन 26 मार्च 2023 दिन रविवार: मां स्कंदमाता पूजा 
6- नवरात्रि छठवां दिन 27 मार्च 2023 दिन सोमवार: मां कात्यायनी पूजा 
7- नवरात्रि सातवं दिन 28 मार्च 2023 दिन मंगलवार: मां कालरात्रि पूजा 
8- नवरात्रि आठवां दिन 29 मार्च 2023 दिन बुधवार: मां महागौरी 
9- नवरात्रि 9वां दिन 30 मार्च 2023 दिन गुरुवार: मां सिद्धिदात्री