Wednesday, October 29, 2025

Tulsi Vivah 2025:हल्दी का ये चमत्कारी उपाय बनाएगा विवाह के शुभ योग, जल्द मिलेगा मनचाहा जीवनसाथी

 


Tulsi Vivah 2025:हल्दी का ये चमत्कारी उपाय बनाएगा विवाह के शुभ योग, जल्द मिलेगा मनचाहा जीवनसाथी



Tulsi Vivah 2025:हल्दी का ये चमत्कारी उपाय बनाएगा विवाह के शुभ योग, जल्द मिलेगा मनचाहा जीवनसाथी


सार

Tulsi Vivah Par Haldi Ke Upay: तुलसी विवाह हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ माना गया है, जिसमें माता तुलसी का विवाह भगवान विष्णु के शालीग्राम रूप से कराया जाता है। इस दिन पूजा करने से वैवाहिक जीवन में प्रेम, सौभाग्य और समृद्धि आती है तथा विवाह संबंधी बाधाएं दूर होती हैं।


Tulsi Vivah Remedies: तुलसी विवाह हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और शुभ त्योहार माना जाता है। यह पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाया जाता है और इस वर्ष यह विशेष अवसर 2 नवंबर 2025 को पड़ रहा है। तुलसी विवाह का आयोजन देव उठनी एकादशी के अगले दिन किया जाता है, इसलिए इसे ‘देव उठान द्वादशी’ के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन माता तुलसी का विवाह भगवान विष्णु के शालीग्राम स्वरूप से विधिपूर्वक संपन्न कराया जाता है।


धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तुलसी विवाह घर-परिवार में सुख, समृद्धि और सौभाग्य को बढ़ाने वाला है। इसे करने से वैवाहिक जीवन में आ रही परेशानियाँ और विवाह में होने वाली देरी जैसी समस्याएँ दूर होती हैं। साथ ही, यह पर्व पति-पत्नी के बीच प्रेम और आपसी समझ को मजबूत करता है। तुलसी विवाह का महत्व केवल पारिवारिक लाभ तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसे करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और पूरे परिवार में खुशियों और सौहार्द का वातावरण बनता है। यह त्योहार आध्यात्मिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसे करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है, जिससे जीवन में संतुलन, सफलता और आंतरिक शांति का अनुभव होता है।


तुलसी विवाह कब है

हर साल तुलसी विवाह कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाया जाता है। इस साल यह तिथि 2 नवंबर 2025 से शुरू होगी। सुबह 7:31 बजे से द्वादशी तिथि प्रारंभ होगी और यह अगले दिन, यानी 3 नवंबर को समाप्त होगी। इस दिन का शुभ मुहूर्त सुबह 5:07 बजे तक माना गया है। इसलिए तुलसी विवाह मुख्य रूप से 2 नवंबर 2025 को ही संपन्न किया जाएगा।


तुलसी विवाह का धार्मिक महत्व

तुलसी विवाह का धार्मिक महत्व बहुत गहरा और पवित्र माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन तुलसी विवाह करने से व्यक्ति को कन्यादान करने के समान पुण्य और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं। इसे करने से जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और वैवाहिक सौहार्द में वृद्धि होती है। माना जाता है कि तुलसी विवाह करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा मिलती है, जिससे व्यक्ति के जीवन में आने वाली परेशानियाँ और बाधाएँ दूर होती हैं। इसके साथ ही घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और पूरे परिवार में खुशियों और आनंद का वातावरण बनता है। यह पर्व न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसे करने से जीवन में संतुलन, सुख-शांति और आध्यात्मिक शक्ति का भी अनुभव होता है।


विवाह में देरी दूर करने के लिए हल्दी का उपाय

स्नान से पहले तुलसी विवाह के दिन स्नान के पानी में एक चुटकी हल्दी डालें।
यह उपाय शरीर और मन की शुद्धि के साथ गुरु ग्रह (बृहस्पति) की शक्ति बढ़ाने के लिए शुभ माना जाता है।
स्नान के बाद साफ और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
पूजा में श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ माता तुलसी और भगवान शालीग्राम की पूजा करें।
तुलसी और शालीग्राम को हल्दी या हल्दी मिले दूध का लेप अर्पित करें।
इस उपाय से कुंडली में बृहस्पति मजबूत होते हैं और विवाह में आ रही रुकावटें दूर होकर शुभ योग बनते हैं।






Tulsi Vivah 2025: तुलसी विवाह में कन्यादान किसे करना चाहिए? जानें पूजा विधि और शुभ समय


 

Tulsi Vivah 2025: तुलसी विवाह में कन्यादान किसे करना चाहिए? जानें पूजा विधि और शुभ समय





सार

Tulsi Kanyadaan: तुलसी विवाह भगवान विष्णु और माता तुलसी के दिव्य मिलन का प्रतीक है, जो भक्ति, प्रेम और समर्पण का उत्सव माना जाता है। यह पर्व शुभता, समृद्धि और मंगल कार्यों के पुनः आरंभ का प्रतीक होता है।


विस्तार

Significance of Tulsi Vivah: हिंदू धर्म में तुलसी विवाह एक अत्यंत पवित्र और भावनात्मक पर्व माना जाता है। यह दिन भक्ति, प्रेम और समर्पण का प्रतीक है। मान्यता है कि माता तुलसी देवी लक्ष्मी का अवतार हैं और भगवान विष्णु उनके शालिग्राम स्वरूप हैं। देवउठनी एकादशी के बाद जब भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं, तब तुलसी माता और भगवान विष्णु का यह दिव्य विवाह संपन्न होता है।


यह शुभ अवसर सृष्टि में पुनः मंगलता, समृद्धि और सौभाग्य के आगमन का प्रतीक माना जाता है। तुलसी विवाह के साथ ही विवाह, गृह प्रवेश और अन्य शुभ कार्यों का शुभ मुहूर्त पुनः आरंभ हो जाता है। इस दिन श्रद्धालु बड़ी श्रद्धा और उल्लास के साथ तुलसी और शालिग्राम के विवाह की रस्में निभाते हैं, जिससे घर-परिवार में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है।


तुलसी विवाह में कन्यादान कौन करता है? 


तुलसी विवाह में कन्यादान की रस्म सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन तुलसी माता को एक कन्या के रूप में पूजकर उनका विवाह भगवान विष्णु के शालिग्राम स्वरूप से कराया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो व्यक्ति तुलसी विवाह का आयोजन करता है, उसे तुलसी माता का पिता माना जाता है और वह कन्यादान का महान पुण्य प्राप्त करता है। इसी कारण तुलसी विवाह को “पुत्री तुलसी का विवाह” भी कहा जाता है। कन्यादान की यह परंपरा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसके पीछे गहरा भावनात्मक और आध्यात्मिक संदेश भी निहित है। माना जाता है कि इस दिन तुलसी माता का कन्यादान करने से मनुष्य को अनेक जन्मों का पुण्य प्राप्त होता है और उसके जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि का वास होता है। विशेष रूप से जिन दंपतियों को संतान सुख की प्राप्ति की इच्छा होती है, उनके लिए यह अनुष्ठान अत्यंत शुभ माना गया है। तुलसी विवाह में कन्यादान करने से व्यक्ति के पाप नष्ट होते हैं और उसके जीवन में शुभता, सौभाग्य और ईश्वर का आशीर्वाद बढ़ता है।


तुलसी विवाह का शुभ मुहूर्त

तुलसी विवाह का पर्व हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को पूरे श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया जाता है। यह पवित्र दिन माता तुलसी और भगवान विष्णु के शालिग्राम स्वरूप के दिव्य मिलन का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस दिन किया गया विवाह या पूजा अनंत सौभाग्य, समृद्धि और शुभ फल प्रदान करती है। इस वर्ष तुलसी विवाह रविवार, 2 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन का प्रमुख शुभ मुहूर्त दोपहर 1:27 बजे से 2:50 बजे तक और सायंकाल 7:13 बजे से 8:50 बजे तक रहेगा। इन पवित्र समयों में तुलसी-शालिग्राम विवाह या पूजा करना अत्यंत शुभ और फलदायक माना जाता है। भक्तजन इन मुहूर्तों में विशेष पूजा-अर्चना कर भगवान विष्णु और तुलसी माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं, जिससे घर में सुख-समृद्धि और सौभाग्य का वास होता है।




Kartik Purnima 2025: 4 या 5 नवंबर कब है कार्तिक पूर्णिमा? जानें तिथि, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व



Kartik Purnima 2025: 4 या 5 नवंबर कब है कार्तिक पूर्णिमा? जानें तिथि, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व




सार

Kartik Purnima Shubh Muhurat: कार्तिक मास की पूर्णिमा अत्यंत शुभ मानी जाती है, जब भगवान विष्णु और चंद्र देवता की विशेष पूजा का विधान है। इस दिन स्नान, दान और दीपदान का विशेष महत्व है और इसे देव दीपावली के रूप में भी मनाया जाता है।



विस्तार

Kartik Purnima Kab Hai: हिंदू सनातन परंपरा में प्रत्येक मास की पूर्णिमा तिथि को अत्यंत शुभ और पूजनीय माना गया है। इस दिन भगवान श्री विष्णु और चंद्र देवता की विशेष आराधना करने का विधान है। पूर्णिमा का दिन वैसे तो हर महीने शुभ फल देने वाला होता है, लेकिन जब यह तिथि श्रीहरि विष्णु को समर्पित पवित्र कार्तिक मास में आती है, तब इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है।


कार्तिक पूर्णिमा को धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। इस दिन स्नान, दान और दीपदान का विशेष महत्व होता है। माना जाता है कि कार्तिक पूर्णिमा पर किया गया पूजन और दान अक्षय फल प्रदान करता है तथा सभी पापों का नाश करता है। इसी दिन देवताओं की दीपावली, यानी देव दीपावली का उत्सव मनाया जाता है, जब समस्त देवता काशी में गंगा तट पर दीप जलाकर भगवान विष्णु और महादेव की आराधना करते हैं।


देव दीपावली कब मनाएं और चंद्रमा को अर्घ्य कब दें

कार्तिक पूर्णिमा का दिन न केवल धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है, बल्कि इसी दिन देव दीपावली का महापर्व भी मनाया जाता है। इस वर्ष, पंचांग के अनुसार, देव दीपावली का सबसे शुभ समय या प्रदोषकाल शाम 5:15 बजे से लेकर 7:50 बजे तक रहेगा। इस अवधि में लगभग ढाई घंटे तक विधिपूर्वक पूजा-अर्चना और दीपदान का आयोजन किया जा सकता है। माना जाता है कि इस समय देवता पृथ्वी पर आकर अपनी दिव्यता प्रकट करते हैं, इसलिए इस दौरान किए गए धार्मिक कर्म विशेष फलदायी माने जाते हैं। साथ ही, कार्तिक पूर्णिमा पर चंद्र देवता की पूजा और उन्हें अर्घ्य देने का भी विशेष महत्व है। इस वर्ष चंद्रोदय शाम 5:11 बजे होगा। इस समय चंद्रमा को अर्घ्य देने और उनके लिए विशेष पूजन करने से मानसिक शांति, सुख-समृद्धि और परिवार में सौहार्द्य की प्राप्ति होती है। चंद्र देव की यह पूजा व्रत और दान के साथ मिलकर पुण्य की मात्रा को और बढ़ा देती है।



कार्तिक पूर्णिमा पूजन विधि

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और सूर्य देव को अर्घ्य दें।
स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें।
मंदिर या पूजा स्थल की सफाई करें और चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं।
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की स्थापना करें।
उन्हें कुमकुम, हल्दी और अक्षत अर्पित करें।
दीपक जलाकर आरती करें।
आरती के दौरान मंत्रों का जाप करें और विष्णु चालीसा का पाठ करें।
भगवान और माता से सुख, शांति और समृद्धि की कामना करें।
पूजा के अंत में फल और मिठाई का भोग अर्पित करें।
प्रसाद सभी परिवार के सदस्यों और मित्रों में वितरित करें।

कार्तिक पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

कार्तिक पूर्णिमा को हिंदू धर्म में देव दीपावली और त्रिपुरारी पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव ने तीन असुरों—संपतासुर, रुपासुर और महामालासुर—का वध किया था, इसलिए इसे भगवान शिव के लिए भी अत्यंत शुभ माना गया है। इसके साथ ही, यह दिन भगवान विष्णु की पूजा के लिए भी विशेष महत्व रखता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा के दिन देवता पृथ्वी पर आते हैं और दिवाली मनाते हैं। इस दिन गंगा और अन्य पवित्र जल तीर्थों में स्नान, ध्यान और दान का अत्यधिक महत्व है। विशेषकर दान और दीपदान करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट होते हैं और उसे अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। शाम के समय दीपदान का महत्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि इसे देवताओं के स्वागत और उनके प्रति भक्ति व्यक्त करने का श्रेष्ठ माध्यम माना गया है। इस प्रकार, कार्तिक पूर्णिमा न केवल धार्मिक क्रियाओं और पूजा का दिन है, बल्कि यह आध्यात्मिक शुद्धि, मानसिक शांति और सामाजिक दान-धर्म का संदेश भी देती है।



Sunday, July 20, 2025

पवित्र सावन मास के सेकंड सोमवार की सभी को हार्दिक शुभकामनाएं, भगवान भोलेनाथ हम सब पर अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखें... 🙏


पवित्र सावन मास के सेकंड  सोमवार की सभी को हार्दिक शुभकामनाएं, भगवान भोलेनाथ हम सब पर अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखें... 🙏

जय जय शिव शंभू 🙏🏻

श्री शिवाय नमस्तुभ्यं 🙏🏻

ॐ नमः पार्वती पतये हर हर महादेव🔱 🚩

#सावन_सोमवार

ॐ नमः शिवाय 🔱🙌

Friday, July 18, 2025

सावन प्रदोष व्रत 2025: सावन का पहला प्रदोष व्रत कब रखा जाता है? जानें तिथि, शुभ योग और उत्सव

सावन प्रदोष व्रत 2025: सावन का पहला प्रदोष व्रत कब मनाया जाता है? तिथि, शुभ योग और उत्सव जानें



सार

सावन प्रदोष व्रत 2025: श्रावण मास का प्रदोष व्रत कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर रखा जाता है। हर माह की त्रयोदशी तिथि को भगवान शिव को समर्पित किया जाता है और इस दिन प्रदोष व्रत रखने की परंपरा है। आइए जानते हैं इस बार सावन का पहला प्रदोष व्रत कौन सा दिन पड़ रहा है। 


सावन प्रदोष व्रत 2025 तिथि:  श्रावण मास का प्रदोष व्रत कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर रखा जाता है। हर माह की त्रयोदशी तिथि को भगवान शिव को समर्पित किया जाता है और इस दिन प्रदोष व्रत रखने की परंपरा है। यह व्रत शिव कृपा प्राप्त करना, पापों से मुक्ति और ग्रहदोष, आर्थिक तंगी और दिवालियापन से मुक्ति प्राप्त करना माना जाता है। इस बार का प्रदोष व्रत 22 जुलाई 2025, मंगलवार को पड़ रहा है, जिसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है। सिद्धांत यह है कि मंगलवार को आने वाले व्रत का विशेष फल होता है। जो लोग इस दिन व्रत उपवास शिव की पूजा करते हैं, उन्हें धन-समृद्धि, भूमि-जयदाद और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

सावन प्रदोष व्रत की तिथि और समय
द्रोण पंचांग के अनुसार सावन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि प्रारंभ 22 जुलाई को सुबह 7:05 बजे से होगी और यह तिथि 23 जुलाई को सुबह 4:39 बजे तक रहेगी। प्रदोष व्रत का पालन 22 जुलाई को ही किया जाएगा।

द्विपुष्कर योग और अन्य शुभ संयोग
22 जुलाई को द्विपुष्कर योग का भी संयोग बन रहा है, जो सुबह 5:37 से 7:05 बजे तक रहेगा। सिद्धांत यह है कि इस योग में किसी भी कार्य या पूजा का दोहरा फल होता है।

मंगला गौरी व्रत का विशेष योग
इस दिन मंगला गौरी का व्रत भी रखा जाता है, जिसमें विशेष रूप से महिलाओं और कुंवारी कन्याओं का पूजन किया जाता है। माँ पार्वती की साज-सज्जा से सर्वथा एकता की प्राप्ति होती है और विवाह योग्य कन्याओं का विवाह होता है।




पूजा का शुभ मुहूर्त
इस दिन की पूजा के लिए प्रदोष काल का समय शाम 7:18 बजे से रात्रि 9:22 बजे तक शुभ रहेगा। साथ ही दिन के अन्य शुभ पुजारी इस प्रकार हैं:
ब्रह्मा : सुबह 4:14 बजे से शाम 4:56 बजे तक
पुजारी:  दोपहर 12:00 बजे से दोपहर 12:55 बजे तक







 

Tuesday, February 25, 2025

मार्च 2025 शुभ मुहूर्त: मार्च में बन रहे हैं कई शुभ मुहूर्त, लिस्ट देखकर धार्मिक आयोजनों का प्लान

 


मार्च 2025 शुभ उत्सव: मार्च में बन रहे हैं कई शुभ उत्सव, लिस्ट देखने वाले धार्मिक आयोजनों के प्लान

हिंदू धर्म में किसी भी मांगलिक या शुभ कार्य को करने से पहले पंचांग की सहायता से भगवान के दर्शन अवश्य करें क्योंकि इससे सिद्ध होता है कि शुभ-अशुभ कार्य में किए गए कार्य के परिणाम नीचे दिए गए हैं। मार्च महीने में विवाह से लेकर गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य के लिए कई शुभ उत्सव बन रहे हैं। तो जारी हैं मार्च माह में शुभ त्योहारों की सूची।



पर प्रकाश डाला गया

  1. हिंदू धर्म में शुभ मुहूर्त देखे गए कार्य हैं।
  2. शुभ अभिषेक में दिए गए कार्य शुभ परिणाम देते हैं
  3. मार्च में बन रहे हैं कई शुभ योग और उत्सव। 
  4. धार्मिक सिद्धांतों के अनुसार मांगलिक एवं शुभ कार्य में यदि शुभ मंगलाचरण शामिल हो तो उन्हें देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है। ऐसे में अगर आप मार्च माह में शुभ कार्य आदि करना चाहते हैं तो मार्च 2025 में आने वाले शुभ उत्सवों की शुभ तिथियों पर धार्मिक कार्यक्रम देख सकते हैं।
मार्च माह के शुभ मुहूर्त 

सर्वार्थ सिद्धि योग (सर्वार्थ सिद्धि योग 2025)

ज्योतिष शास्त्र की दृष्टि से सर्वार्थ सिद्धि योग को काफी शुभ माना जाता है। ऐसे में मार्च में 02, 04, 05, 09, 10, 11, 16, 19, 20, 23, 24, 30 मार्च के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है।

अमृत ​​सिद्धि योग (अमृत सिद्धि योग 2025)
ज्योतिष शास्त्र में अमृत सिद्धि योग को एक शुभ योग माना जाता है। मार्च माह में यह योग केवल दो ही दिन यानी 16 और 19 मार्च को बन रहा है।

गाड़ियाँ और भव्य वस्तुएँ

वाहन की खरीदारी के लिए -   02, 06, 09, 16, 17, 19, 20, 27 और 30 मार्च का दिन शुभ रहेगा।

संपत्ति या घर आदि की खरीद के लिए - मार्च माह में संपत्ति आदि की खरीद के लिए कई उद्देश्य बन रहे हैं, जो इस प्रकार हैं - 09, 13, 19, 20, 29 और 30 मार्च सर्वश्रेष्ठ।


विवाह उत्सव उत्सव - 01, 02, 05, 06, 07, 12 और 14 मार्च विवाह के लिए शुभ रहता है।
गृह प्रवेश उत्सव- 01, 06 और 14 मार्च के दिन गृह प्रवेश के लिए शुभ उत्सव बनाये जा रहे हैं।

जन्मोत्सव के लिए - पंचांग के अनुसार 02, 03, 05, 06, 09, 10, 14, 16, 17, 19, 20, 24, 27, 30 और 31 मार्च का दिन शुभ रहेगा।

अन्नप्राशन उत्सव- 03, 06, 24, 27 और 31 मार्च का दिन अन्नप्राशन उत्सव के लिए शुभ है।
कर्णवेध उत्सव - 02, 15, 16, 20, 26, 30 और 31 मार्च का दिन शुभ है।
उपनयन/जनेऊ संस्कार - मार्च महीने में जनेऊ संस्कार के लिए 01, 02, 14, 15, 16 और 31 मार्च का दिन सबसे उत्तम है।
मार्च माह में 02, 03, 09 और 10 मार्च को विद्यारंभ संस्कार के आयोजन किये जाते हैं।

मुंडन उत्सव - मुंडन के मार्च माह में 03, 17, 21, 27 और 31 तारीख को शुभ उत्सव बन रहा है।